जींद। खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की ओर से दुकानों से लिए गए सैंपल फेल होने के बाद दुकानदारों के खिलाफ अदालत में मामला दायर नहीं करने पर सरकार ने चार खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारियों को नियम सात के तहत चार्जशीट कर दिया है। सरकार ने अब पूरे मामले की जांच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंक मैनेजमेंट के रिटायर्ड डायरेक्टर डॉ. केएल धींगड़ा को सौंपी है।
शीतलपुरी कॉलोनी निवासी वीरेंद्र जांगड़ा ने 2020 में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से सूचना मांगी थी कि जो सैंपल फेल आए हैं, उनके खिलाफ अदालत में केस दायर किया गया है या नहीं। विभाग ने इसकी कोई सूचना नहीं दी। इसके बाद वीरेंद्र जांगड़ा ने 17 अगस्त 2022 को इसकी सीएम विंडो पर शिकायत दी। इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। वीरेंद्र जांगड़ा ने सीएम विंडो पर 7 बार रिमाइंडर लगाए। इसके बाद पता चला कि विभाग हर बार इस शिकायत को फाइल कर देता है और सीएम ऑफिस से फिर से शिकायत पर कोई न कोई आपत्ति लग जाती है। 2023 में वीरेंद्र जांगड़ा ने इस पूरे मामले की शिकायत खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के कमिश्नर को दी। इसके बाद पूरे मामले की जांच विजिलेंस ने की। इस जांच में जींद में तैनात रहे जिला खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी डॉ. भंवर सिंह, डॉ. अरविंद्रजीत, डॉ. हर्ष कुमारी तथा डॉ. राजीव कुमार दोषी पाए गए। इन सभी को सरकार ने रूल सात के तहत चार्जशीट कर दिया। अब इस पूरे मामले की जांच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंक मैनेजमेंट के रिटायर्ड डायरेक्टर डॉ. केएल धींगड़ा को सौंपी है। वीरेंद्र जांगड़ा ने कहा कि इन अधिकारियों ने दुकानदारों से सांठगांठ करके भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। भ्रष्टाचार के कारण इन दुकानदारों के खिलाफ समय पर अदालत में केस दायर नहीं किया गया। नियमों के अनुसार कोई भी खाद्य सैंपल फेल आता है तो उसके खिलाफ तीन महीने के अंदर अदालत में केस दायर करना होता है, ताकि दुकानदार पर जुर्माना लगाया जा सके।