13जेएनडी24-अहोई माता की कथा सुनने के बाद सूर्य देवता को जल अर्पण करने के लिए एकत्रित हुई महिलाए
उचाना। संतान की दीर्घायु की कामना, सुख-समृद्धि, उज्जव भविष्य के लिए माताओं ने अहोई माता का व्रत रखा। सोमवार सुबह सूर्य उदय होने से पहले महिलाओं ने मीठा व्यंजन खाया। दोपहर को महिलाओं ने एकत्रित होकर अहोई माता की कथा को सुनने के बाद सूर्य देवता को जल अर्पण किया। शाम को अंधेरा होने के बाद तारा निकलने के बाद उसे जल अर्पण कर अपने व्रत को खोला। पुजारी भारतेंदु शास्त्री ने कहा कि मातृत्व की ममता और संकल्प की शक्ति का पर्व अहोई अष्टमी है। ये व्रत संतान की दीघार्य एवं संतान की कामना के लिए रखा जाता है। संवाद