संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जिन किसानों ने खरीफ 2022 के तहत अपनी फसलों का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करवाया था, फसल खराब होने पर उन सभी किसानों को क्लेम नहीं मिला है। जिले के 500 के आसपास किसानों के अभी भी सवा करोड़ रुपये बकाया है। सफीदों से कांग्रेस विधायक सुभाष गांगोली ने कहा कि वह इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। गांगोली ने कहा कि 17 जिलों के दो लाख 43 हजार किसानों के 1178 करोड़ रुपये अभी तक बकाया है। बीमा कंपनियां प्रीमियम तो ले लेती हैं लेकिन किसानों को क्लेम नहीं दे रहीं हैं। यह योजना किसानों को कंगाल बनाने की योजना है।
पिछले वर्ष खरीफ फसलें बरसात के कारण खराब हो गई थी। इनमें सबसे ज्यादा जुलाना, उचाना, सफीदों के किसान प्रभावित हुए थे। जिले के लगभग एक हजार किसानों ने फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियम अदा किया था। इन किसानों में लगभग 500 किसानों को कंपनियों ने क्लेम के रूप में एक करोड़ 90 लाख रुपये अदा कर दिए लेकिन 500 किसान अभी भी ऐसे हैं, जिनको कंपनियों ने क्लेम नहीं दिया। इसमें कभी कोई नियम का बहाना तो कभी कोई नियम का बहाना बनाया जा रहा है। इन 500 किसानों को लगभग सवा करोड़ रुपये का क्लेम मिलना है। ऐसे में यह किसान कृषि विभाग के चक्कर काट रहे हैं। गांव जलालपुर कलां निवासी नरेश ने कहा कि उसने कपास की दो एकड़ में फसल की बिजाई की थी। उसने अपनी फसल का बीमा करवाया था लेकिन अभी तक उसे मुआवजा नहीं मिला है। उसे 30 हजार रुपये मिलने थे।
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विधानसभा में उठाएंगे मुद्दा
विधायक सुभाष गांगोली ने कहा कि बीमा कंपनियां अपनी मनमर्जी चला रही हैं। किसानों पर पहले तो सरकार द्वारा फसल का बीमा करवाने का दबाव बनाया जाता है, जब मुआवजा देने की बात आती है कि सरकार बीमा कंपनियों का ही पक्ष लेती है। किसानों के मुआवजे पर तरह-तरह की आपत्तियां लगाई जाती हैं। बीमा कंपनियां व सरकार किसानों को लूट रही हैं। यह मुद्दा विधानसभा में उठाया जाएगा।
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जिन किसानों का मुआवजा बकाया है, उनका कोर्ट में मामला चला हुआ है। बीमा कंपनी ने अदालत में मामला दायर किया हुआ है। जिले के किसानों का लगभग सवा करोड़ रुपये मुआवजे का बकाया है। उच्चाधिकारियों को यह रिपोर्ट भेजी हुई है। -गिरीश नागपाल, कृषि उपनिदेशक, जींद।