नरवाना। ढाबी टेक सिंह गांव के किसान शमेशर सिंह व महेंद्र सिंह खुद आर्गेनिक गुड़ व शक्कर तैयार करके दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने हैं। यह अपने खेतों में ही गन्ना उगाते हैं और खुद ही कोल्हू लगाकर गुड़ व शक्कर तैयार कर रहे हैं। उनको अपना गुड़ व शक्कर बेचने के लिए किसी मंडी या मार्केट की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि लोग खुद ही उनसे गुड़ लेने के आ जाते हैं। हर वर्ष जनवरी से लेकर मार्च तक उनका कोल्हू चलता है और वह इससे लाखों रुपये कमा रहे हैं।
दोनों किसान अपने खेत में आर्गेनिक तरीके से गन्ना उगाते हैं और फिर उसी गन्ने के रस से अपने खेत में लगे कोल्हू की सहायता से गुड़ व शक्कर में बदलकर अच्छा मुनाफा का रहे हैं। उनको अपने गुड़ व शक्कर के अच्छे दाम भी मिल रहे हैं। इसके अलावा क्षेत्र के लोग किसान के खेत से ही गुड़ व शक्कर खरीदकर ले जा रहे हैं और खेत में लगे कोल्हू से गुड़ बनने की विधि भी जान रहे हैं। किसान शमशेर सिंह का मामना है कि आखिर कब तक किसान अपनी फसलों के रेट को लेकर सरकारों से लड़ते रहेंगे। किसान को अपनी पहचान खुद बनानी होगी और इसके लिए खेती सबसे अच्छा माध्यम है। महेंद्र सिंह ने कहा कि हम अपनी कच्ची फसलों को अगर अपने आप ही तैयार करके मार्केट में बेचते हैं तो हमें किसी मंडी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इससे हम अन्य कई लोगों को रोजगार भी दे सकेंगे और अपने परिवारों को अपने खेतों के दम पर सक्षम भी बना सकेंगे। गुड़ व शक्कर हर घर में इस्तेमाल होते हैं, लेकिन मार्केट में मिलावट से बने जहरीले खाद्य पदार्थ लोगों को बेच दिए जाते हैं। इससे लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। लोगों के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखकर ही शमशेर सिंह ने यह ठानी कि वह ऐसा काम करेगा, जिससे मुनाफा भी हो और लोगों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जा सके। जिसके बाद विचार विमर्श कर गुड़ का कोल्हू शुरू किया गया। शमशेर सिंह ने बताया कि इस काम में उसे धान व गेहूं की फसल से ज्यादा बचत हो रही है और लागत भी लगभग एक समान ही होती है। जहां धान व गेहूं की फसल में 20 से 25 हजार की बचत होती थी, वहीं अब गन्ने एक लाख रुपये प्रति एकड़ मुनाफा हो रहा है।
अपने खेत में एक साथ तैयार कर लेते कई फसलें
शमशेर सिंह ने बताया कि उस पास पांच एकड़ जमीन है। इस पांच एकड़ में वह एक साथ चार से पांच फसलें तैयार कर लेता है और फसलों में किसी भी प्रकार की कोई कीटनाशक नहीं डाली जाती। सभी फसलों में उसके खेत में लगे बायोगैस के प्लांट से गोबर की खाद की जाती है। गन्ने के साथ शमशेर ने इस समय अपने खेतों में बाग लगाया है, जिसमें अमरूद, मौसमी, किन्नू, लीची, केला और प्याज उगाया हुआ है। उसका मकसद लोगों को शुद्व व आर्गेनिक फल व उत्पाद उपलब्ध करवाता है। आर्गेनिक उत्पाद का रेट भी अच्छा मिलता है।
लोग अपनी आंखों के सामने तैयार करवाते हैं गुड़ व शक्कर
किसान शमशेर सिंह ने कहा कि वह पारपंरिक तरीके से खेती कर रहा था तो एक साधारण किसान था। जब से गन्ने की आर्गेनिक खेती शुरू की उसको पहचान मिलने लगी। वह अपने गुड़ को तैयार करते समय उसमें सौंफ, मुंगफली, काजू, बादम मिलाता है। काफी लोग अपने सामने ही गुड़ तैयार करवाते हैं। वह 100 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गुड़ व शक्कर बेच रहे हैं।