जींद। एक निजी कंपनी से नौकरी छोड़कर फरैन कलां निवासी अजमेर मलिक ने खेती की ओर रुख किया और इससे वह अब लाखों रुपये कमा रहा है। इससे पहले वह अपने पांच एकड़ जमीन पर गेहूं व कपास सहित अन्य परंपरगत फसलों की खेती करता था। सालभर में खेती से उसे 50 हजार रुपये ही बचते थे। जिससे घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। ऐेसे में अजमेर मलिक ने अपनी चार एकड़ जमीन पर बाग लगाया और एक एकड़ में वह नेट हाउस लगाकर खीरा उगाने लगा। अच्छा मुनाफा होने पर फिर अजमेर मलिक ने नौकरी और परंपरागत खेती की ओर मुड़कर भी नहीं देखा। मलिक ने बताया कि वह पिछले पांच साल से चार एकड़ में बाग लगा रहा है। वहीं एक एकड़ में नेट हाउस लगाया हुआ है। एक एकड़ से उसे दो से ढाई लाख रुपये की बचत हो रही है। वहीं, एक एकड़ बाग पर केवल 30 से 40 हजार रुपये खर्च होते हैं। उसने फिलहाल चार एकड़ में अमरूद, आड़ूू, नींबू व किनू के बाग लगाए हुए हैं और एक एकड़ में नेट हाउस में खीरा लगाया हुआ है। संवाद
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मित्र की सलाह पर शुरू की बागवानी
निजी कंपनी में काम करते हुए अजमेर मलिक को घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा था। वह इसके साथ गेहूं व कपास सहित अन्य परंपरागत फसलों की खेती करता था, लेकिन कुुछ खास बचत नहीं हो पा रही थी। इसके बाद अजमेर को एक मित्र ने बाग लगाने की सलाह दी। उसने बागवानी विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया तो उसे पता लगा कि बागवानी के लिए सरकार द्वारा अनुदान भी दिया जा रहा है। पांच साल पहले उसने अपने पांच एकड़ में बागवानी शुरू कर दी। जब उसे नौकरी से ज्यादा मुनाफा बागवानी में होने लगा तो उसने नौकरी छोड़कर अपना पूरा ध्यान बागवानी पर लगा दिया।