संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। महान शक्ति संगठन कला धाम में आयोजित तीन दिवसीय गुरु पर्व महोत्सव के दूसरे दिन ऋषि सुखदेव महाराज ने श्रद्धालुओं को दिव्य ज्ञान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सतगुरु के मुख से निकला हर शब्द वरदान होता है, जो सुनकर चल पड़े वहीं विद्वान होता है।
उन्होंने कहा कि सत्संग, सेवा, सिमरन, दान करने और पूर्ण सतगुरु द्वारा बताए ज्ञान अमृत रूपी वचनों पर अमल करने से ही इंसान का कल्याण निश्चित है। यह मानव जीवन प्रभु भगवान ने अपने स्वार्थ के लिए नहीं दिया, बल्कि सभी मनुष्यों की भलाई और परोपकार के लिए ही दिया है। जहां स्वार्थ और लालच इंसान को अज्ञान रूपी नश्वर संसार और नरक की ओर ले जाते हैं। वहीं सत्य ज्ञान और शुद्ध पवित्र विचार इंसान को सत्य स्वरूप प्रभु भगवान की ओर ले जाते हैं और उनके सच्चे प्रेम और वास्तविक आनंद की प्राप्ति करवाते है। ऋषि सुखदेव महाराज ने कहा कि प्रभु भगवान तो भक्त के शुद्ध पवित्र हृदय में ही वास करते हैं। प्रभु भगवान से मिलन करने और उनकी अपार कृपा प्राप्त करने के लिए इंसान को निस्वार्थ भाव से सत्संग, सेवा, सिमरन, दान, दुखी, लाचार, बेसहारा व जरूरतमंद जीवों की भलाई के कार्य कर परोपकार करते रहना चाहिए। शुभ कार्य करते हुए कभी भी मन में अहंकार नहीं लाना चाहिए।