फोटो 14जेएनडी18-लखमीरवाला में किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी देतीं डॉ. प्रीति
जींद। लखमीरवाला गांव में मंगलवार को किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। इसमें डॉ. प्रीति मलिक ने किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और कृषि लागत कम करने के उपायों की जानकारी दी। डॉ. प्रीति मलिक ने कहा कि प्राकृतिक खेती मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। किसानों को स्थानीय जलवायु, मिट्टी की स्थिति और फसलों की जरूरतों के अनुसार प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाना चाहिए। उन्होंने किसानों को पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाकर खेती को टिकाऊ बनाने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण के दौरान जीवामृत, बीजामृत और आच्छादन जैसी विधियों के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, जैव विविधता के संरक्षण और खेती में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग करने के तरीकों की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का उद्देश्य केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि लागत को नियंत्रित करने, पर्यावरण संरक्षण और भूमि की उर्वरता बनाए रखने पर भी जोर देना है। किसानों को नई कृषि पद्धतियों की जानकारी देकर उन्हें खेती के टिकाऊ विकल्पों से जोड़ना ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य है।