18जेएनडी21-खेतों में लहलाती सरसों की फसल। संवाद
जींद। मौसम में अचानक बदलाव आने से पारा 25 डिग्री तक पहुंच गया है। इस बदलाव का प्रभाव फसलों पर पड़ सकता है। सबसे ज्यादा प्रभाव सरसों विशेषकर पछेती बुआई की फसल पर चेपा कीट के आक्रमण का पड़ सकता है, क्योंकि यह मौसम चेपा कीट के अनुकूल है। चेपा कीट का आक्रमण होता है तो खेतों में विकसित हो रही सरसों और गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाएगा। इसके अलावा तापमान में बढ़ोतरी से पछेती सरसों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। जिले में किसानों ने लगभग सवा लाख हेक्टेयर से अधिक में गेहूं तथा 10 हजार हेक्टेयर से अधिक में सरसों की बिजाई की हुई है। पिछले एक सप्ताह से तापमान 20 डिग्री से बढ़कर 25 डिग्री तक पहुंच गया है। रविवार को अधिकतम तापमान 27 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री दर्ज किया गया। हवा की गति 15 किलोमीटर प्रतिघंटा रही और मौसम में आर्द्रता 32 प्रतिशत रही। यदि तापमान में इसी तरह वृद्धि होती रही तो यह गेहूं व सरसों फसल में बीमारी ला सकता है। जो किसानों के लिए परेशानी का सबब बनेगा और उत्पादन भी कम होगा। हालांकि किसान इस समय एक अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। यदि बारिश होती है तो यह दोनों ही फसलों के लिए सोने पर सुहागा साबित होगी।
फल को बीमारी से बचने के लिए एहतियात बरतने की जरूरत
बदलते मौसम में किसानों को बीमारियों से बचाने के लिए एहतियात बरतने की जरूरत है। गेहूं व सरसों फसल पर कीटों का आक्रमण न हो, इसके लिए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसलों की नियमित रूप से निगरानी करते रहने की सलाह दी है, ताकि फसल में लगने वाले रोगों का समय पर नियंत्रण किया जा सके और नुकसान से बचा सके। अभी गेहूं फसल में अल व चेपा दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में सरसों उत्पादक किसानों को विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। फसल में अल या अन्य परजीवी देखने पर किसान कृषि विशेज्ञों से सलाह ले सकते हैं। यदि गेहूं में कहीं पर निशान दिखाई दे रहे हैं तो वह पौधा उखाड़ दें। बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो कीटनाशक का प्रयोग करें।
यह है पिछले एक सप्ताह का तापमान
तिथि
अधिकतम तापमान
न्यूनतम तापमान
18 फरवरी
26 डिग्री
16 डिग्री
17 फरवरी
25 डिग्री
08 डिग्री
16 फरवरी
24 डिग्री
07 डिग्री
15 फरवरी
24 डिग्री
07 डिग्री
14 फरवरी
22 डिग्री
09 डिग्री
13 फरवरी
20 डिग्री
09 डिग्री
कृषि विभाग के मौसम विज्ञानी डॉ. राजेश ने बताया कि मौसम बीमारियों के अनुकूल बना हुआ है। किसान लगातार खेतों का भ्रमण करते रहें। अल परजीवी दिखे तो कीटनाशक का प्रयोग करें। किसान लगातार सरसों के फूलों व पत्तों पर भी नजर रखें। कीटनाशक के साथ-साथ जरूरत के हिसाब से फसलों में सिंचाई करें।
18जेएनडी21-खेतों में लहलाती सरसों की फसल। संवाद