जींद। राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण (नालसा) और सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता व सुलह परियोजना समिति के मार्गदर्शन में मेडिएशन फॉर द नेशन 3.0 अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य न्यायालयों में लंबित ऐसे मामलों का आपसी सहमति से त्वरित और कम खर्च में समाधान कराना है जिनमें समझौते की संभावना हो। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अमित सिहाग ने बताया कि एक अगस्त से 30 सितंबर तक मध्यस्थता योग्य मामलों की पहचान की जाएगी जबकि अभियान का औपचारिक शुभारंभ एक अक्तूबर से होगा। इसके तहत वैवाहिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस, वाणिज्यिक एवं व्यापारिक विवाद, सेवा संबंधी मामले, उपभोक्ता विवाद, संपत्ति विभाजन, किरायेदारी, भूमि अधिग्रहण तथा अन्य सिविल मामलों को मध्यस्थता के लिए चिह्नित किया जाएगा। अमित सिहाग ने कहा कि मध्यस्थता से समय, धन और मानसिक तनाव की बचत होती है तथा पक्षकारों के आपसी संबंध भी बने रहते हैं। उन्होंने नागरिकों, अधिवक्ताओं और विभिन्न विभागों से इस अभियान का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने बताया कि इच्छुक पक्षकार जिला न्यायालय परिसर स्थित मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र या जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण से संपर्क कर सकते हैं।