एक अप्रैल से जहां स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई शुरू हो गई है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन के नियम बच्चों के पढ़ाई आड़े आ रहे हैं। नियम 134-ए के तहत गरीब परिवारों के बच्चों परीक्षा देकर निजी स्कूलों में पढ़ने का सपना लिए बैठे हैं। इसको लेकर अब प्रशासन और अभिभावक आमने-सामने हैं। इसको लेकर दो जाम पांच जन मुद्दे आंदोलन के कार्यकर्ताओं के साथ अभिभावक एडीसी कार्यालय पहुंचे और बच्चों की उत्तर पुस्तिकाओं की सही जांच नहीं करवाने के आरोप शिक्षा विभाग पर लगाए। इस पर एडीसी ने दोपहर बाद ऑफिस पहुंच कर मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया।
बुधवार को अभिभावक परीक्षा परिणाम की दोबारा जांच करवाने की मांग को लेकर एडीसी आमना तस्नीम से मिलने पहुंचे। दो जमा पांच के सदस्य व अभिभावकों की सुबह 11 बजे से ही एडीसी कार्यालय में जमा हो गए, लेकिन एडीसी से मिलने के लिए अभिभावक जिद पर अडे़ रहे। दोपहर तक भी एडीसी कार्यालय नहीं पहुंची तो अभिभावकों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद मौके पर खंड शिक्षा अधिकारी परिणिता मधोक ने अभिभावकों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन अभिभावकों ने नहीं सुनी। वे एडीसी से मिलने की बात पर अड़े रहे। दो बजे के करीब एडीसी ऑफिस में मौजूद कर्मियों ने एडीसी का फोन नंबर देकर मामले को शांत करना चाहा, लेकिन एडीसी दोपहर बाद चार बजे करीब कार्यालय पहुंची अभिभावकों की शिकायत सुनी।
गौरतलब है कि नियम 134ए के तहत हुई परीक्षा में से 1619 बच्चों ने परीक्षा दी, मंगलवार परीक्षा परिणाम में कुल 411 बच्चे ही पास हो पाए। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग पर पेपर सही चेक नहीं करने के आरोप लगाए हैं। अभिभावकों के आरोप है कि बच्चे को गैर हाजिर दिखाया गया। किसी बच्चे का दो बार लिस्ट में नाम पाया गया। शिक्षा विभाग पर मिलीभगत का आरोप लगाया। अभिभावकों का कहना था कि जब बच्चा स्कूलों 94 प्रतिशत अंक ला रहा है तो शिक्षा विभाग बच्चों को जानबूझकर फेल कर रहा है।
परीक्षा परिणाम में हुई भारी धांधली
नियम 134-ए के तहत हुई परीक्षा में भारी धांधली हुई है। परीक्षा परिणाम की दोबारा जांच कराई जाए। बच्चों का पेपर अच्छा हुआ है। ऐसे में बच्चों को शिक्षा विभाग ने फेल कर दिया। जब बच्चा शुरू से ही पढ़ाई होशियार रहा है। इस पूरे मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
गीता, अभिभावक
अप्रैल माह बीतने को है, लेकिन बच्चे का अभी तक दाखिला नहीं हो पाया। अब तो किसी स्कूल में दाखिला के लिए जाते हैं तो कह देते है कि अब बच्चे पूरे हो चुके हैं। अब नियम 134-ए पर ही नजरेें हैं। बच्चे का पेपर अच्छा हुआ है, लेकिन रिजल्ट में फेल बताया गया है। हमारी मांग है कि 33 प्रतिशत वाले बच्चे को पास किया जाए। सभी बोर्ड में यही रूल है। इसे 134-ए में भी लागू करें।
कीर्ति, अभिभावक
पूरे मामले की हो जांच
नियम 134-ए के तहत हुई परीक्षा में भारी गड़बड़ी हुई है। मैं कमेटी की सदस्य हूं, लेकिन शिक्षा विभाग ने मुझे परीक्षा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। पेपर का समय तीन घंटे का था, लेकिन दो घंटे बच्चों का पेपर छीन लिया गया। कक्षा 10वीं की परीक्षा में पेपर में 60 अंक हैं तो 35 नंबर लेने वाले बच्चे को फेल दिखाया गया। शिक्षा विभाग के कर्मचारियों पर निजी स्कूलों के साथ मिलीभगत की है। जब सभी बोर्ड विद्यार्थी को 33 प्रतिशत अंक वाला पास मना जाता है तो 134-ए में भी यही नियम लागू किया जाए।
- सुमन श्योराण, जिलाध्यक्ष दो जमा पांच मुद्दे आंदोलन
नियम 134-ए के तहत हुई परीक्षा में शिकायत के आधार पर पूरे मामले की जांच की जाएगी। परीक्षा में जो भी खामियां पाई गईं उन्हें दूर किया जाएगा।
आमना तस्नीम, एडीसी