सरकार द्वारा दलितों को दिए गए प्लाटों को लेकर मुआना गांव में विवाद हो गया है। दलितों ने गांव के ही कुछ लोगों पर प्लाटों में निर्माण रोकने का आरोप लगाया है। इसके चलते मंगलवार रात भर यहां पुलिस तैनात रही। आरोप है कि कुछ लोगों ने मंगलवार देर रात प्लाट की नींव उखाड़ दी। वहीं दूरा पक्ष इसे तालाब की जमीन बता रहा है और इस पर कब्जा नहीं होने देने की बात कह रहा है।
सूचना पर थाना प्रभारी नर सिंह गांव में पहुंचे, मामला के गंभीरता को देखते हुए रात भर पुलिस गांव में रही और तनाव को कम करने का प्रयास किया गया। बुधवार को एसडीएम बलराज जाखड़ ने मौके का मुआयना करने के लिए नायाब तहसीलदार को भेजा। अब भी गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।
गौरतलब है कि वर्ष 1975-76 में गांव के खासरा नंबर 454 में करीब 64 प्लाट 3-3 मरले के अलॉट किए गए। यह जमीन आवासीय योजना के तहत उक्त लोगों को अलॉट की गई थी। तभी से ये लोग इन प्लाटों को प्रयोग कर रहे थे। पिछले कुछ दिनों से गांव के कुछ लोगों द्वारा उक्त प्लाटों को खाली करवाने की कोशिश की जा रही है।
इससे ये विवाद ओर बढ़ गया। आठ फरवरी को प्लाटों से जबरदस्ती मिट्टी हटवाई गई। इसकी शिकायत एसडीएम सफीदों को दी गई। जिसके बाद निशानदेही ली गई। उसके बाद भी कार्य नहीं करने देने से रोषित लोग 29 मार्च को डीसी जींद से मिले।
कोर्ट ने पीड़ित वर्ग के पक्ष में दिया फैसला तो कर दी मारपी
इस मामले में दूसरा पक्ष इसे गांव के तालाब की जमीन बता रहा है। प्रशासन की चुप्पी को देखते हुए पीड़ित वर्ग ने सफीदों कोर्ट से गुहार लगाई। जिसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पीड़ित वर्ग के पक्ष में किसी भी व्यक्ति को काम ना रोकने के आदेश दिए। मंगलवार को किए गए निर्माण को दूसरे पक्ष ने गिरा दिया और लोगों के साथ मारपीट की गई।
लाखों रुपये का नुकसान किया
पीड़ित वर्ग के धर्मपाल, राजेंद्र, गोपी, सुशील, रामधन, मा. महीपाल, राजेश, प्रकाश आदि ने बताया कि वे इस जमीन पर करीब 40 वर्षो से काबिज हैं। अब ये लोग चुनावी रंजिश निकालने के लिए ऐसा कर रहे हैं। इस बार चुनाव में पीड़ित वर्ग ने उक्त लोगों का साथ ना देकर सरपंच बने मास्टर सुखबीर का साथ दिया।
जिससे खफा होकर ये लोग उन्हें परेशान करने में लगे हैं। तोड़फोड़ में उन्हें लाखों रुपये का नुकसान और मानसिक रूप से परेशान किया गया है। उन्होंने जातिसूचक गालियां दी गई। उन्होंने कहा कि अब उन्होंने पुलिस से इंसाफ की गुहार लगाई है।
विवाद को देखते हुए दोबारा निशानदेही करवाई जाएगी। तालाब की जमीन पूरी कर प्लाट दिए जाएंगे। गांव में कोई तनाव नहीं है। प्रशासन नजर बनाए हुए है।
बलराज जाखड़, एसडीएम सफीदों