फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घोटाला: सरकारी स्कूल, श्मशान घाट और तालाब की जगह में फसल दिखा कर दिया चहेतों को मुआवजा वितरित

Sat, 15 Jul 2023 01:16 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, जुलाना, जींद (हरियाणा)

सार

जुलाना तहसील में फसल खराबे के मुआवजा वितरण में घोटाले का मामला सामने आया है। पुलिस ने तत्कालीन नायब तहसीलदार और राजस्व विभाग के पटवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कपास की फसल दिखाकर कर चहेतों को मुआवजा वितरित करने का आरोप है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

तहसील कार्यालय में खरीफ 2014, रबी 2015 और खरीफ 2015 की खराब हुई फसल की मुआवजा राशि के वितरण में करीब एक करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ है। पुलिस ने राजस्व विभाग के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

विज्ञापन


मालवी गांव में 2014-2015 में खराब हुई फसल की मुआवजा राशि के वितरण में धांधली सामने आई है। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मिलीभगत करके सरकारी स्कूल, तालाब, श्मशान घाट और जलघर में भी फसल दिखाकर मुआवजा राशि अपने चहेतों को वितरित कर दी। ऐसे लोगों को भी चेक जारी किए गए, जिनके नाम कोई जमीन ही नहीं है। एपीआर में नाम किसी का और आरटीजीएस किसी के नाम करवाई गई। लगभग सात साल बाद अब पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है।

मालवी गांव निवासी जयभगवान दलाल ने शिकायत में बताया कि 2014 और 15 में खराब हुई फसल की एक करोड़ आठ लाख की मुआवजा राशि वितरित की गई, जिसमें एक करोड़ की धांधली का आरोप है। सिर्फ डीसी रेट के पटवारी सतीश कुमार को 2017 में हटाकर जांच को पूरा किया गया, लेकिन इसके जिम्मेवार राजस्व विभाग के अधिकारियों तक आंच नहीं आने दी गई। उसने इसकी शिकायत कई बार सीएम विंडो पर दी, लेकिन लीपापोती की गई। अब इसकी शिकायत गृहमंत्री अनिल विज से की गई तो पुलिस ने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
विज्ञापन


32 आरटीजीएस ऐसी, जिनका एपीआर लिस्ट में नाम भी नहीं
जयभगवान दलाल ने आरोप लगाया कि मुआवजा वितरण में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने घोटाला करते हुए ऐसे लोगों को भी लगभग नौ लाख की आरटीजीएस कर दी, जिनके एपीआर (एग्रीकल्चर प्रोग्रेस रिपोर्ट) लिस्ट में नाम नहीं थे। कुछ ऐसे भी किसान थे, एपीआर में नाम किसी का और आरटीजीएस किसी अन्य किसान के नाम करवा दी गई।

69 किसान ऐसे, जिनके नाम जमीन ही नहीं
मालवी गांव में फसल मुआवजे के नाम पर 69 ऐसे किसानों को भी चेक दिए गए, जिनके नाम पर जमीन ही नहीं है। अगर किसी के पास है तो बहुत कम है। सांठगांठ करते हुए हर किसान को 35 से लेकर 28 हजार रुपये मुआवजा दिया गया। इसकी राशि लगभग 15 लाख रुपये बनती है।

सरकारी हिदायतों को किया दरकिनार
सरकार की हिदायत थी कि किसी भी किसान को पांच एकड़ से ज्यादा का मुआवजा नहीं दिया जाएगा, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत करते हुए 65 ऐसे किसानों को मुआवजा दिया, जो सरकार द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार गलत था। 65 किसानों को लगभग 34 लाख का मुआवजा दिया गया।

कार्यालय में बैठकर की गई गिरदावरी
मालवी गांव की फसल खराबे की गिरदावरी तहसील कार्यालय में बैठकर की गई, क्योंकि सरकारी स्कूल, वाटर टैंक, श्मशान घाट और तालाब के अंदर कपास की फसल दिखाकर मुआवजा दिया गया। एक-एक किसान को दो-दो चेक दिए गए। आरोप है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ गांव के नंबरदार भी शामिल हैं।

मामले को दबाने की हुई कोशिश
मालवी गांव के जयभगवान ने आरोप लगाया कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि तत्कालीन नायब तहसीलदारों पर एफआईआर दर्ज न करके जिस नायब तहसीलदार की मौत हो चुकी है, केवल उसी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि खरीफ 2014 में राकेश नायब तहसीलदार, रबी 2015 का मुआवजा अनिल कुमार नायब तहसीलदार और खरीफ 2015 का सुरेश खर्ब नायब तहसीलदार ने मुआवजा वितरित किया था। उन्होंने तीनों नायब तहसीलदार, ईश्वर कानूनगो और सतीश पटवारी के खिलाफ शिकायत दी थी लेकिन मामला केवल एक नायब तहसीलदार के खिलाफ दर्ज किया गया है, जिसकी 2017 में मौत हो चुकी है।

उपायुक्त कार्यालय से पत्र मिला था, जिसमें तत्कालीन नायब तहसीलदार, हलका पटवारी व स्टाफ पर फसल खराबे के मुआवजे में धोखाधड़ी और गबन के आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने तत्कालीन नायब तहसीलदार सुरेश खर्ब और हलका पटवारी सतीश व स्टाफ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। -समरजीत सिंह, थाना प्रभारी जुलाना।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें