पोल्ट्री कारोबारी जितेंद्र ढुल के अनुसार यह कारोबार घाटे का सौदा हो रहा है। इसके चलते काफी कारोबारियों ने औने-पौने दाम पर माल निकाला है। जो चूजा 20 रुपये का बिक रहा था, उसको कोई लेने वाला नहीं है। न ही उसे हैचरी में रखा जा सकता है। वहीं अंडा साढ़े तीन रुपये प्रति पीस बिक रहा था, लेकिन अब दो रुपये तक बिक रहा है। अंडे को भी अधिक समय तक नहीं रखा जा सकता है। चिकन 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा था, जो अब 20-25 रुपये तक बिक रहा है। इसके चलते बचे हुए माल को फार्मर नष्ट कर रहे हैं।
अब तक एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान
जींद जिला में पोल्ट्री उद्योग का बड़ा कारोबार है। पिछले करीब 25 दिन में इसमें एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इससे पोल्ट्री उद्योग टूट गया है। अधिकतर फार्म खाली पड़े हैं। हैचरी व लेयर फार्म को खाली किया जा रहा है। बचे हुए माल को फार्मर जमीन में दफना रहे हैं।
ठेके पर लेकर भी चलाते हैं मुर्गी फार्म
काफी लोग मुर्गी फार्म किराये पर लेकर भी मुर्गी पालन का काम करते हैं। इनको दोहरा नुकसान हो रहा है। मुर्गी की मांग नहीं रहने से कम रेट पर माल बेचा गया है। अब फार्म खाली पड़े हैं। वहीं किराये के पैसे मालिक को देने ही पड़ेंगे। ऐसे लोगों पर दोहरी मार पड़ रही है।
चिकन से कोरोना का खतरा नहीं
चिकन से कोरोना का खतरा नहीं है। यह महज अफवाह है। अभी तक एक भी ऐसा केस नहीं आया है। इसके अलावा हमारे देश में लोग पका हुआ चिकन खाते हैं। यह पूरी तरह से सुरक्षित है। लोग चिकन खा सकते हैं। - डॉ. राजू शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सक, पशुपालन विभाग।