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दो महीने पहले पिता की मौत, अब बस से गिर बेटे की भी गई जान, पांच बहनों का था इकलौता भाई

Wed, 16 Oct 2019 01:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जींद (हरियाणा)
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बस से गिरने मरने वाले छात्र की फाइल फोटो।
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सहकारी परिवहन समिति की बस के दरवाजे पर खड़े दसवीं के छात्र की गिरने से मौत हो गई। हादसा सोमवार शाम चार बजे उस समय हुआ जब वह स्कूल से घर लौट रहा था। बड़ौदा गांव का रहने वाला छात्र कर्मदीप उचाना के सरकारी स्कूल में पढ़ता था।

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सोमवार दोपहर के बाद जब स्कूल की छुट्टी हुई तो वह बस में सवार होकर घर लौट रहा था। इस दौरान बस में भीड़ होने के कारण वह दरवाजे के पायदान पर खड़ा होकर सफर कर रहा था। आरोप है कि बस चालक द्वारा ट्रैक्टर-ट्रॉली को ओवरटेक करते समय कट मारा गया तो कर्मदीप का बैग ट्रॉली में उलझ गया जिससे वह बस से नीचे गिर गया और उसकी मौत हो गई।

इसमें परिजनों ने बस चालक के खिलाफ लापरवाही से बस चलाने का आरोप लगाकर मामला दर्ज करवाने की मांग की तो पुलिस ने छात्र की बस से गिरने के कारण मौत का मामला दर्ज किया। ऐसा करने पर पुलिस और परिजनों के बीच विवाद हो गया, जिससे छात्र के शव का 24 घंटे तक पोस्टमार्टम नहीं हुआ।

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मंगलवार को दिनभर इसे लेकर नागरिक अस्पताल में हंगामा चलता रहा। परिजनों और पुलिस के बीच कई बार बातचीत हुई, लेकिन दोपहर तक बात सिरे नहीं चढ़ पाई। इसके बाद पुलिस ने तीन बजे परिजनों के दोबारा बयान लिखे। इसके बाद ही पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू की गई।

छात्र के परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस बस चालक की लापरवाही के मामले को दबाना चाहती है। उन्होंने कहा कि कर्मदीप की मौत बस के दरवाजे से गिरने से नहीं, बल्कि प्राइवेट बस चालक की लापरवाही के कारण हुई है। परिजनों ने बताया कि प्राइवेट बस जब उचाना पुलिस थाना के पास पहुंची तो ड्राइवर ने बस के आगे जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली से बचाने के लिए अचानक कट मारा था।
 
इससे दरवाजे में खड़े कर्मदीप का बैग ट्रॉली में उलझ गया और वह नीचे गिर गया। नीचे गिरने से कर्मदीप की मौत हो गई। उचाना थाना के जांच अधिकारी एसआई राजबीर सिंह ने बताया कि मृतक के चाचा जगबीर की शिकायत पर प्राइवेट बस के अज्ञात चालक के खिलाफ लापरवाही से बस चलाने के आरोप में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। नागरिक अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दया है।

पांच बहनों का इकलौता भाई था कर्मदीप
बड़ौदा निवासी कर्मदीप पांच बहनों का इकलौता भाई था। कर्मदीप के पिता की दो महीने पहले बीमारी के चलते मौत हो गई थी। अब घर की आस पूरी तरह से कर्मदीप पर थी। कर्मदीप की मौत के बाद अब घर का आंगन सूना हो गया है।
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