जींद। केंद्रीय विद्यालय में क्लर्क लगवाने का झांसा देकर 18 लाख रुपये ठगने के आरोप में शहर थाना पुलिस ने रामनगर कॉलोनी निवासी सचिन और उसके पिता बलवान के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
शहर थाना पुलिस को दी शिकायत में कहसून गांव निवासी बीरेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2022 में उनकी मुलाकात रामनगर कॉलोनी निवासी सचिन से हुई थी। सचिन बैंक में कृषि कार्ड व लोन का काम करता है। सचिन ने उनका कृषि कार्ड बनवाया था। इस दौरान हुई बातचीत में सचिन ने कहा कि वह बच्चों को विदेश भेजने व सरकारी नौकरी लगवाने का काम करता है। इसके बाद वह लगातार नौकरी लगवाने की बात कहकर उसको गुमराह करता रहा। इस दौरान उसके दोस्त सुखबीर के भांजे ने केंद्रीय विद्यालय में क्लर्क की नौकरी लगवाने की बात कही। उन्होंने इस बारे में सचिन से बात की तो उसने इसके लिए 18 लाख रुपये की मांग की। नौकरी के लिए उन्होंने 18 लाख रुपये में सहमति जताई। इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन व चेक से उसके मोबाइल नंबर पर 10 लाख रुपये डलवा दिए। इसके बाद दो लाख रुपये उसके पिता बलवान को घर पर कैश दे दिया। तीन लाख रुपये सचिन नया बस अड्डा के सामने देकर आया। जब परिणाम आया तो उनके भांजे का नाम लिस्ट में नहीं आया। इसके बाद उन्होंने रुपये वापस मांगे को उन्होंने फर्जी चेक दे दिया, जिसे बैंक में लगाने पर बाउंस हो गया। जब उन्होंने घर जाकर रुपयों की मांग की तो उन्होंने उनके साथ गाली-गलौज की और झगड़ा करने लगे व रुपये देने से मना कर दिया। इस मामले में शहर थाना पुलिस ने आरोपी पिता-पुत्र सचिन व बलवान के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। संवाद
रोहतक रोड चौकी की महिला पुलिसकर्मी पर धमकाने का आरोप
पीड़ित ने बताया कि रोहतक रोड पुलिस चौकी की महिला कर्मचारी को शिकायत दी तो पहले उन्होंने एक महीने का समय दिलवाया, लेकिन बाद में समय पूरा होने पर दोबारा गया तो महिला पुलिस कर्मचारी ने उनको धमकी देकर का कि वह रुपये निकलवाने के लिए नहीं बैठी। इसके बाद शहर थाना में शिकायत दी तो थाना प्रभारी ने बलवान सिंह को बुलाया। इसके बाद आरोपी ने दो लाख रुपये वापस कर दिए। बाद में शहर थाना में भी कार्रवाई नहीं की गई।
दोबारा फिर लिया झांसे में
पीड़ित ने बताया कि आरोपी ने एक दिन फिर उसको घर बुलाकर अपने झांसे में ले लिया। इसमें उसने तीन लाख रुपये फिर वापस लिए और एक वर्ष में दो लड़कों को ग्रुप डी में लगवाने का झांसा दिया। जिसके बाद आरोपी ने न तो नौकरी लगवाई और न ही उसके रुपये लौटाए।