जींद। नरवाना क्षेत्र में पाए गए 163 फर्जी राशन कार्ड के के मामले को आपूर्ति विभाग ने गंभीरता से लिया है। इस मामले में नरवाना कार्यालय के चार इंस्पेक्टरों पर गाज गिर सकती है। डीएफएससी ने नरवाना कार्यालय के वर्ष 2019-20 में तैनात चार इंस्पेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिख दिया है। 163 फर्जी राशन कार्डधारकों से सरकारी डिपो से लिए हुए राशन की रिकवरी करने के आदेश दिए हैं। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत दी गई जानकारी में नरवाना क्षेत्र के 163 राशन कार्ड धारक फर्जी मिले थे। आरटीए में मांगी गई जानकारी के अनुसार फर्जी मिले 163 कार्डधारक वर्ष 2019 से राशन ले रहे थे। इन लोगों ने वर्ष 2019 में राशन कार्ड बनवाए थे। उसके बाद से ही यह कार्डधारक सरकारी डिपो से राशन ले रहे हैं। इनकी वर्तमान मार्केट वेल्यू के हिसार से रिकवरी की कुल राशि 36 लाख रुपये के करीब बनती है। अब विभाग अधिकारी इन कार्ड धारकों से रिकवरी करवाकर राशि सरकारी खजाने में जमा कराई जाएगी।
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2019-20 में बनाए गए थे एपीएल से बीपीएल
वर्ष 2019-20 में एनआईसी के द्वारा जिले में राशन कार्ड बनाए गए थे। राशन कार्ड बनवाने को लेकर ऑनलाइन प्रक्रिया के नाम पर पांच से लेकर दस रुपये तक लिए गए थे। उस दौरान जिन लोगों के एपीएल या ओपीएच राशन कार्ड थे। उन लोगों के बदलकर बीपीएल कार्ड बनाए गए थे। इस दौरान न तो कार्ड धारकों के घर जाकर उनका सर्वे किया था और न ही सरपंच या पार्षद से आवेदक बारे पूछताछ की गई थी। संभावना है कि यह सब कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ था। एनआईसी द्वारा जिन युवकों की राशन कार्ड बनाने में जिम्मेदारी लगाई थी, उनकी योग्यता भी पूरी नहीं थी।
वर्जन
विभाग ने चार इंस्पेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा है। वहीं जिन 163 फर्जी कार्ड धारकों ने चार साल राशन लिया है। उनसे रिकवरी करने के लिए एएफएसओ को निर्देश जारी कर दिए हैं। यदि किसी ने रिकवरी नहीं करवाई तो उसके खिलाफ विभाग कानूनी कार्रवाई अमल में लाएगा।
निशांत राठी, डीएफएससी, जींद।