14जेएनडी15 : नागरिक अस्पताल में बच्चों का इलाज करते बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रघुबीर पूनिया। संवाद
जींद। प्रतिदिन मौसम में हो रहे बदलाव का असर नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों पर पड़ने लगा है। दिन में तेज धूप निकल रही है और सुबह-शाम के समय तापमान में गिरावट आ रही है। इसके चलते नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों को खांसी, जुकाम और बुखार हो रहा है।
जिला मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल की बात की जाए तो वायरल संक्रमण के 500 से अधिक की ओपीडी प्रतिदिन हो रही है। इसमें 200 से ज्यादा छोटे बच्चे शामिल हैं। इस समय नागरिक अस्पताल में केवल एक बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. रघुबीर पूनिया ही हैं। नागरिक अस्पताल 200 बेड का है। रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं। वहीं बदलते मौसम के कारण सिविल अस्पताल में रोजाना गला दर्द, बुखार पीड़ित के औसतन 200 मरीज आ रहे हैं। मरीजों के इलाज में करीब नौ दिन का समय लग रहा है। चिकित्सक इन मरीजों को इलाज के साथ बदलते मौसम में ठंडी चीजों से परहेज करने की सलाह दे रहे हैं।
मौसम में बदलाव ने मच्छर भी बढ़ रहे हैं। घरों में लाइट जलाते ही छोटे मच्छर आ जाते हैं, जो परेशान करते हैं। नमी से मच्छर, मक्खियों की संख्या भी बढ़ रही है। इससे संक्रमण बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में चिकित्सकों के अनुसार मक्खियों और मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। घर के आसपास पानी जमा नहीं होने दें। बच्चों में रोग प्रतिरोधी के कमजोर होने से बीमारियों का संक्रमण बढ़ता है। जिससे बचने के लिए बच्चों को विटामिन सी की जरूरत होती है। इसके लिए कीवी, संतरे और ड्रैगन फ्रूट आदि फल खिलाने चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. रघुवीर पूनिया ने बताया कि इन दिनों शिशुओं में कफ, बुखार और जुकाम की शिकायतें बढ़ रहीं हैं। इससे बचाव के लिए शिशु की माता को खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खाने-पीने के हर सामान को ढककर रखना चाहिए। शिशुओं के कपड़ों को समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। छोटे बच्चों को एसी में कम तापमान करके नहीं सुलाना चाहिए।
बदलते मौसम में छोटे बच्चे भी बुखार की चपेट में आ रहे हैं। अभिभावकों को सावधान रहने की जरूरत है। लोगों को अपने घरों व आसपास सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ठंड से बचाव के भी उपाय करने की जरूरत है। -डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पातल, जींद।
14जेएनडी15 : नागरिक अस्पताल में बच्चों का इलाज करते बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रघुबीर पूनिया। संवाद