जींद। जम्मू में 20 सितंबर को असंतुलित होकर गाड़ी के खाई में गिरने से बीएसएफ के चार जवान बलिदान हो गए थे। इनमें जिले के 54 वर्षीय बीएसएफ के हवलदार दयानंद भी शामिल थे। रविवार को उनके पैतृक गांव ईगराह में उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के समय हजारों की संख्या में आसपास के गांवों के लोग मौजूद रहे। हिसार सेना मुख्यालय से आए गार्द ने अंतिम सलामी दी। छह साल बाद दयानंद सेवानिवृत्त होने वाले थे।
भाई बंसी रेढू ने बताया कि दयानंद 23 अगस्त को ही छुट्टी काटकर ड्यूटी पर गए थे। उनकी ड्यूटी राजस्थान के बिकानेर में थी। वह इस समय चुनाव होने के कारण जम्मू में चुनाव ड्यूटी पर थे। गश्त के दौरान उनकी गाड़ी असंतुलित होकर गहरी खाई में गिर गई थी। इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में उनकी उपचार के दौरान मौत हो गई। रविवार सुबह उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा था। लोगों ने भारत माता की जय और दयानंद अमर रहे के नारे लगाए। हिसार से बीएसएफ के सीनियर कमांडेंट राजबीर अपनी टुकड़ी के साथ आए और अंतिम संस्कार की रस्म अदा कि। सेना के जवानों ने शस्त्र झुकाकर उनको अंतिम सलामी दी।
कांग्रेस प्रत्याशी विनेश फोगाट, भाजपा प्रत्याशी कैप्टन योगेश बैरागी, इनेलो प्रत्याशी सुरेंद्र लाठर, जजपा प्रत्याशी अमरजीत ढांडा ने भी अंतिम संस्कार में भाग लिया और दयानंद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके अलावा इंडियन वेटरनर ऑर्गेनाइजेश के प्रधान कैप्टन राजेंद्र रेढू, उपप्रधान कैप्टन जोगेंद्र खटकड़, संयोजक सूबेदार अमरनाथ, जोनल प्रधान राजबीर, सतबीर, राममेहर ने भी शहीद को श्रद्धांजलि दी।
बेटे ने दी मुखाग्नि
दयानंद के बेटे दीपक ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। दीपक गुरुग्राम में रहते हैं और वहीं काम करते हैं। दयानंद की पत्नी की काफी समय पहले मौत हो चुकी है। दीपक की दो बेटियां हैं। दीपक ने बताया कि उनकी पिता रो हर रोज बात होती थी। 2030 में वह सेवानिवृत्त होने वाले थे।
22जेएनडी25 : बलिदानी दयानंद का फोटो।
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