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बिना मानदेय ऑनलाइन काम करने के लिए किया जा रहा बाध्य : राजबाला

Mon, 14 Aug 2023 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। आशा वर्कर्स यूनियन का मांगों को लेकर सोमवार को हड़ताल के सातवें दिन भी लघु सचिवालय के बाहर धरना जारी रहा। सोमवार को धरने की अध्यक्षता पूनम ने की, जबकि संचालक मंजू मंगलपुर ने किया।
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आशा वर्करों को संबोधित करते हुए सीटू के जिला कैशियर संदीप जाजवान, आशा वर्कर्स यूनियन की जिला सचिव राजबाला ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग जनहित का हवाला देकर आशा वर्कर्स को बिना मानदेय दिए ऑनलाइन काम करने के लिए बाध्य कर रहा है लेकिन आशा वर्करों ने ऑनलाइन काम का पूर्ण रूप से बहिष्कार कर रखा है। दूसरी तरफ प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग पिछले 17 साल से स्वास्थ्य विभाग के अंदर ही काम करने वाली आशा वर्कर्स के स्वास्थ्य की गारंटी नहीं कर पाया हैं। स्वास्थ्य विभाग और सरकार द्वारा चलाई जा रही जनहित कार्य केवल दिखावा बनकर रह गई है। पिछले तीन वर्ष से आशा वर्कर मांगों और समस्याओं को लेकर बार-बार स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और सरकार को पत्र लिख रही है परंतु समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा। कोरोना माहमारी में फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में काम करने वाली आशा वर्कर्स को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा ग्लोबल हेल्थ लीडर्स के अवार्ड से सम्मानित किया गया है जिन आशा वर्कर्स को पूरी दुनिया में सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि जिन जनहित कार्यों का हवाला देकर अलग-अलग जिलों में आशा वर्कर्स को अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी और जिलों के अधिकारी एक बार अपने जिले के स्वास्थ्य विभाग की हालात पर नजर डालें और उनमें सुधार करें। ताकि जनता को बेहतर सुविधाएं दी जा सकेंगे। आशा वर्कर्स को डराने धमकाने का मतलब आशा वर्कर्स को पूरे प्रदेश में आंदोलन के लिए मजबूर करना है। उन्होंने कहा की पिछले पांच वर्षों में आशाओं के मानदेय और प्रोत्साहन राशियों में राज्य सरकार ने कोई भी बढ़ोतरी नहीं की है और पिछले 12 वर्ष से केंद्र सरकार ने भी प्रोत्साहन राशियों में कोई इजाफा नहीं किया है जिस कारण आशा वर्कों को मजबूरी में हड़ताल करनी पड़ रही है। इस अवसर पर सुमन, शीला, सुखदेई, राजपति, बबीता, बिमला, उमा, पूजा, मीना, गीता मौजूद थी।
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