जींद। प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर रोडवेज डिपो का शेड्यूल बिगड़ गया है। इसके कारण कागजी कार्रवाई और बसों की चेकिंग पर असर पड़ा है। वहीं, रोजाना फोर्स लाने के लिए भेजी जा रही बस के कारण भी रूट प्रभावित हो रहे हैं, जिसका असर यात्रियों पर पड़ रहा है।
पिछले कई दिनों से रोडवेज डिपो के लिपिक और चेकिंग स्टाफ की ड्यूटी विधानसभा चुनाव में लगी हुई है, जिससे कर्मचारियों से लेकर डिपो तक के काम रुक गए हैं। इनके अलावा बस की कमी के कारण डिपो को आर्थिक नुकसान हो रहा है। फिलहाल जींद डिपो में 70 रोडवेज बस हैं। इनमें से कुछ बस लंबे रूट पर भेजी जा रही हैं। इसके अलावा लोकल रूट पर भी जा रही हैं। डिपो में फिलहाल 90 चालक और 135 परिचालक हैं। फोर्स लेने के लिए भेजी गई बस के कारण डिपो में चालकों की संख्या भी कम हो गई है। अब ये बस कब डिपो में आएंगी, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। रोडवेज जींद डिपो में रोजाना लगभग 12 लाख रुपये आमदनी होती है। वहीं, नरवाना और सफीदों सबडिपो की बस भी प्रतिदिन लगभग सात लाख रुपये कमाकर ला रही हैं, लेकिन चुनाव के कारण यात्रियों की संख्या कम हो गई है। इससे आमदनी पर भी असर पड़ रहा है।
बॉक्स
फोर्स लाने के लिए रोजाना भेजी जा रही बसें
रोडवेज डिपो से दूसरे जिलों से फोर्स लाने के लिए बस भेजी जा रही है। इन बस को रूट से हटाकर भेजा रहा है, क्योंकि डिपो में फिलहाल बस की कमी है। इसके कारण डिपो सभी बस को लंबे रूट पर भेजकर काम चला रहा है। डिपो को पिछले कई दिनों से फोर्स लाने के लिए बस भेजनी पड़ रही है। तीन-चार दिन पहले डिपो ने पानीपत, सोनीपत और अंबाला भेज दिया था। वहीं, 23 सितंबर को 11 बस फोर्स लाने के लिए भेजी गई। इसके बाद फिर पांच बस फोर्स लाने के लिए भेजी गई। इनके भेजने से डिपो में बस की भारी कमी हो गई है। लंबे और लोकल रूट पर असर साफ दिखाई दे रहा है। घोघड़ियां, हथवाला, पिल्लूखेड़ा, पेगां, शामदो, चांदपुर, नगूरां, शाहपुर जाने वाली बस बंद कर दी गई है। इसके कारण गांव से शहर में पढऩे आने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बॉक्स
लोकल रूट पर बस चलाने की मांग
गांव से शहर में पढ़ने आने वाले युवा संदीप, रोहित, जगसीर, महावीर, दुर्गेश, सोनू का कहना है कि लोकल रूट पर बस बंद होने से उनको ज्यादा परेशानी हो रही है। ग्रामीण क्षेत्र का शहर से संपर्क टूट गया है, क्योंकि गांव से शहर आने के लिए निजी वाहन के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है। रोजाना वह बाइक लेकर शहर में पढ़ने के लिए नहीं आ सकते। डिपो प्रबंधन को चाहिए कि वे लोकल रूट पर चलने वाली बसों को बंद न करें। इसके कारण हजारों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर असर पड़ेगा।
वर्जन
डिपो के चालक-परिचालकों को छोड़कर अन्य स्टाफ की विधानसभा चुनाव में ड्यूटी लगी है। इसका असर कामकाज पर पड़ रहा है। जिला प्रशासन के आदेश पर फोर्स लेने के लिए बसों को भी दूसरे जिलों में भेजा रहा है।
-राहुल जैन, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो जींद