जींद। आशा कार्यकर्ताओं ने वीरवार को लघु सचिवालय के सामने स्वास्थ्य मंत्री का पुतला फूंका और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि हड़ताल के डेढ़ माह बीत चुके हैं लेकिन उनसे किसी नेता ने बातचीत नहीं की।
वीरवार को धरने की अध्यक्षता यूनियन की नेता मंजू और संचालन जिला सचिव राजबाला ने किया। सचिव राजबाला ने बताया कि वर्ष 2018 के बाद आशा वर्करों का मानदेय एक पैसा भी नहीं बढ़ाया गया है। जबकि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। इससे आशा वर्करों में भारी रोष है। सरकार की हठधर्मिता से आम जनता को होने वाले नुकसान से प्रदेश सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता दिख रहा लेकिन आशा वर्कर भी अपनी मांगों से पीछे हटने वाली नहीं है। जब तक आशा वर्करों को पक्के कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता या न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये मासिक नहीं किया जाता तब तक आशा वर्करों की हड़ताल जारी रहेगी। रिटायर्ड कर्मचारी संघ के राज्य सचिव आजाद पांचाल व सीआईटीयू जिला सचिव कपूर सिंह ने कहा कि एक तरफ संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात केंद्र सरकार कर रही है और दूसरी तरफ महिलाओं को सडक़ पर बैठा रखा है।