नरवाना। आर्य समाज नरवाना की ओर से भाद्रपद पूर्णिमा के अवसर पर राजकीय महाविद्यालय नरवाना के आवासीय परिसर में पर्यावरण शुद्धि एवं समृद्धि के लिए हवन का आयोजन किया गया। हवन में आर्य समाज के सदस्यों ने आहुति डालकर पर्यावरण संरक्षण और समाज के कल्याण की कामना की। आर्य समाज के प्रधान चंद्रकांत आर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और पर्यावरण के प्रभाव का गहन अवलोकन किया गया है। पूर्णिमा और अमावस्या के अवसर पर अल्पाहार या उपवास का विधान स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना गया है। उन्होंने कहा कि सत्य ज्ञान को धारण कर उसके अनुसार कर्म करना ही वास्तविक श्राद्ध है। जीवित माता-पिता, धार्मिक एवं विद्वान व्यक्तियों, ऋषि-मुनियों की श्रद्धापूर्वक सेवा करना ही श्राद्ध और तर्पण की सार्थकता है। पुरोहित मिथिलेश शास्त्री ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्ञान का दान सर्वोत्तम माना गया है। सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए धन का दान भी आवश्यक है। संवाद