कृषि विभाग कार्यालय में अधिकारियों की बैठक लेते अतिरिक्त निदेशक डॉ. राजेंद्र सोलंकी। विज्ञप्ति
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जींद। कृषि विभाग कार्यालय नरवाना में वीरवार को कृषि निदेशालय से पहुंचे अतिरिक्त निदेशक डॉ. राजेंद्र सोलंकी ने कर्मचारियों की बैठक ली।
इस दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उसके बाद उन्होंने नरवाना के रेड जॉन गांवों का दौरा किया। वहां गांव खरल में किसानों की बैठक लेकर फसल अवशेषों में आग न लगाने की अपील की। उन्होंने बताया कि सरकार क्रॉप रेैजिडयू स्कीम के अंतर्गत किसानों को पराली प्रबंधन से संबंधित सभी उपकरण 50 से 70 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवा रही है और किसानों को 1000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी दे रही है। किसानों को इस स्कीम का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सुपरसीडर का प्रयोग करके किसान खेत में बचे अवशेषों को जमीन में मिलाकर भी गेंहू की बिजाई कर सकते हैं तथा उक्त स्कीम का लाभ ले सकते हैं। उन्होंने गांवों में जाकर खेतों में स्ट्रा बेलर व हेरैक के प्रयोग से किए जा रहे पराली प्रबंधन का जायजा लिया। किसानों को जागरुक करते हुए बताया कि बेलर से बनाई गई पराली की गांठे बॉयो एनर्जी प्लांट में बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी बढ़ाई जा सकती है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि डीसी ने जिले में बढ़ रहे फ सल अवशेष जलाने संबंधित मामलों पर सख्ती बरतने बारे निर्देश जारी किए हैं जिनकी अनुपालना में कृषि विभाग ने गांव दर गांव में गश्त बढ़ा दी है। प्रत्येक गांव में कर्मचारी मुस्तैदी से सुबह 9 बजे से सांय 6 बजे तक कड़ी नजर रखे हुए हैं तथा जैसे ही आगजनी का कोई मामला सामने आता है तुरंत राजस्व पटवारी के साथ घटना स्थल पर पहुंचकर निशानदेही करते हुए जुर्माना किया जा रहा है। जिले में अब तक आगजनी के कुल 50 मामले सामने आए हैं, जिन पर कार्रवाई करते हुए अब तक एक लाख 40 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है।