जींद। हरियाणा का जाटलैंड एवं राजनीतिक राजधानी माने जाने वाले जींद जिले में मतदाताओं ने सत्ता विरोधी लहर और किसान आंदोलन की हवा निकालते हुए जिले की चार सीटों पर कमल खिलाने का काम किया है। उम्मीदों के खिलाफ कांग्रेस केवल जुलाना विधानसभा सीट पर जीत दर्ज करने में सफल रही। पहली बार जींद जिले में भाजपा बड़ी मजबूती के साथ विधानसभा में दस्तक देने में सफल रही है। जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है।
जींद विधानसभा क्षेत्र से डाॅ. कृष्ण मिड्ढा, उचाना से देवेंद्र अत्री, नरवाना से कृष्ण बेदी, सफीदों से रामकुमार गौतम चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। जुलाना विधानसभा सीट पर कांग्रेस की स्टार उम्मीदवार विनेश फोगाट 6015 वोटों से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच रही है। यहां पर भाजपा के कैप्टन योगेश ने विनेश फोगाट के पसीने छुड़ाकर रखे। विनेश फोगाट इतना बड़ा चेहरा होने के बावजूद अधिक मतों से नहीं जीत पाई।
जींद जिले में भाजपा की इतनी बड़ी जीत का अनुमान किसी भी राजनीतिक पंडित को नहीं था। यहां पर सट्टा बाजार और एग्जिट पोल पूरी तरह से फेल हो गए। असल में जींद जिले में जो राजनीतिक समीकरण बने, उनमें कांग्रेस को जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा। जींद जिले की नरवाना विधानसभा सीट पर जाट वोट बैंक कांग्रेस और इनेलो के बीच बंट गया, जिससे भाजपा को मजबूती मिली और पूर्व मंत्री कृष्ण बेदी चुनाव जीतने में सफल रहे। सफीदों विधानसभा सीट पर जसबीर देशवाल भाजपा के बागी होकर आजाद चुनाव लड़ा और भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हुए। यहां पर भाजपा के रामकुमार गौतम बाहरी होने के बाद भी जीत गए। उन्होंने कांग्रेस के सुभाष गांगोली को हराया। यहां पर भाजपा पहली बार कमल खिलाने में कामयाब हुई।
उचाना विधानसभा सीट पर कांग्रेस के बागी उम्मीदवार वीरेंद्र घोघड़िया ने कांग्रेस को शिकस्त देने का काम किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह यहां भाजपा के देवेंद्र अत्री से 32 वोटों से चुनाव हार गए, जबकि वीरेंद्र सिंह घोघड़िया 31 हजार से ज्यादा वोट लेने में सफल रहे। जींद विधानसभा सीट पर भाजपा ने 16860 वोटों से जीत दर्ज की। यहां पर इस बार गांव में भी भाजपा उम्मीदवार को बड़ी सफलता मिली है। जिन गांवों में भाजपा पहले चुनाव हारती रही, उनमें भी जीतने में कामयबा रही।
जींद जिले के राजनीतिक हालात और चुनाव परिणाम यह बताते हैं कि जिले में जाट वोट बैंक बंट गया, जबकि गैर जाट वोट बैंक भाजपा के साथ खड़ा रहा। भाजपा की जीत में डीएससी वर्ग और पिछड़ा वर्ग की अहम भूमिका रही है। इस वोट बैंक में कांग्रेस सेंध लगाने में विफल रही। इस कारण उसे हार का सामना करना पड़ा।
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गैर जाटों पर भरोसा करना भाजपा को आया रास
जींद जिले में भले ही जाट वोट बैंक बड़ी संख्या में हो, लेकिन भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत जिले में एक भी जाट समुदाय से उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा। पांच में से एक सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, तो बाकी चार में से दो पर ब्राह्मण, एक पंजाबी और एक बीसी को मैदान में उतारा। इससे गैर जाट वोट बैंक भाजपा की तरफ आकर्षित हुआ और पांच में से चार सीटों पर कमल खिलाया।