जींद। समावेशी शिक्षा से दिव्यांग बच्चे को सीखने के लिए बेहतर माहौल दिया जा सकता है। इससे उसका सर्वांगीण विकास संभव है। ये बात विशेष शिक्षा रिसोर्स पर्सन अक्षय शर्मा ने शनिवार को भिवानी रोड पर रिहैबिलिटेशन एंड रिसर्च सेंटर में भारतीय पुर्नवास परिषद, नई दिल्ली के तीन दिवसीय जोनल स्तरीय कार्यक्रम के दूसरे दिन संबोधित करते हुए कही।
इस कार्यक्रम के दूसरे दिन का शुभारंभ निदेशक डॉ. आशुतोष ने किया। सभी रिसोर्स पर्सन ने अपने अनुभव साझा किए। रिसोर्स पर्सन अक्षय शर्मा ने कहा कि साधारण बच्चों के साथ-साथ जब हम दिव्यांग बच्चों को शिक्षा देते हैं तब उनका विशेष रूप से शिक्षक को ध्यान रखना होता है ताकि उनमें किसी प्रकार की हीन भावना विकसित नहीं हो। उन्हें समान अवसर प्रदान करना शिक्षकों का दायित्व है ताकि हर छात्र का सर्वांगीण विकास हो सके क्योंकि आदर्श शिक्षिका की अमिट छाप बच्चों के व्यक्तित्व पर पड़ती है। रिसोर्स पर्सन रितु ने कहा कि समय के साथ समाज में जागरूकता आई है और अब माता पिता अपने बच्चों की कमियों को पहचान कर उन्हें उचित शिक्षा दे रहे हैं।
समावेशी शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी बहुत महत्व दिया गया है। इस अवसर पर दर्पण सोसायटी के सदस्य डॉ. राजेश्वर, अर्चना, जयपाल, कोऑर्डिनेटर देवेंद्र अहलावत, रिसोर्स पर्सन रविंद्र, हरियाणा वेलफेयर सोसायटी फॉर पर्सन विद स्पीच एंड हियरिंग के सेंटर सिरसा से किस्मती देवी, भुवनेश कुमार सक्सेना, राजबीर सिंह, सहायक प्रो. डॉ. नरेंद्र सिंह, रितेश दीक्षित, साइकोलॉजिस्ट डॉ. विपुल मौजूद रहे।
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09जेएनडी12-तीन दिवसीय सीआरई कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागी और रिसोर्स पर्सन। विज्ञप्ति