जींद। प्रदेश में एक बार फिर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति आंदोलन की राह पर चलने की रणनीति बना रही है। इसके लिए 14 जून को जींद में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी। इसमें कई अहम मुद्दों पर विचार होगा। इसमें पहलवानों का समर्थन, किसानों पर लाठीचार्ज का विरोध समेत जाट आरक्षण आंदोलन के समय की सभी मांगें पूरी नहीं होने पर विचार किया जाएगा।
प्रदेश में फरवरी 2016 में हुए जाट आरक्षण आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था। उस समय जगह-जगह आगजनी हुई थी और प्रदेश में 31 युवाओं की जान चली गई थी। दिसंबर 2016 में जींद में ईक्कस गांव के पास समिति ने धरना शुरू कर दिया था। 58 दिन तक चले धरने के बाद समिति की सरकार के साथ बातचीत हुई। इसमें सरकार के साथ समझौता हो गया था। इसमें मृतक युवाओं के परिवारों को दस-दस लाख रुपये व सरकारी नौकरी, घायलों को डेढ़ लाख, एक लाख तथा 50-50 हजार रुपये देने तथा जाट समाज को ओबीसी में शामिल करने समेत सभी मांगों पर सहमति बनी थी। जाट समाज को ओबीसी में आरक्षण तो नहीं मिला लेकिन बाकी सभी मांगें पूरी हो गई थी।
आरक्षण के मामले में अदालत ने स्थगन आदेश जारी किए थे। इसके अलावा युवाओं पर दर्ज हुए मुकदमे भी वापस लेने की सहमति बनी थी, जिनमें से कुछ मामले ही अभी तक लंबित थी। इस पूरे आंदोलन के सूत्रधार अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक रहे। इसके बाद धीरे-धीरे संघर्ष समिति कमजोर पड़ने लगी और आपस में फूट भी हो गई। अब एक बार अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति अपने पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक रही है। फिलहाल यशपाल मलिक इस संघर्ष समिति के संरक्षक बन चुके हैं जबकि प्रताप सिह दहिया इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं। एक बार फिर समिति समाज के लोगाें को जोड़ने में लग गई थी। इसके लिए 14 जून को यहां एक होटल में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है। संवाद
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खिलाड़ियों व किसानों के आंदोलन के लिए बनेगी रणनीति
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रेस प्रवक्ता रामकरण दलाल नंदगढ़ ने बताया कि 14 जून को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक जींद में होगी। इसमें पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्तमान में संघर्ष समिति के संरक्षक यशपाल मलिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रताप सिंह दहिया, हरियाणा प्रभारी आजाद लटवाल, जाट सेवा संघ के चेयरमैन एडवोकेट रणधीर कड़ौदा, गंगाराम श्योरण, महेंद्र सिंह मलिक, रणबीर पूनिया मुख्य वक्ता के रूप में भाग लेंगे। दलाल ने कहा कि यशपाल मलिक पांच साल से जींद में नहीं आए थे। अब एक बार फिर वह संघर्ष समिति को मजबूती प्रदान करेंगे। इस बैठक में खिलाड़ियों व किसानों के आंदोलन को लेकर रणनीति बनाई जाएगी।