जींद। नरवाना रोड स्थित दादा खेड़ा में श्रद्धालुओं ने हवन-पूजन कर सुख-शांति की कामना की। असमर्थ महिला कल्याण न्यास के संस्थापक पं. रामनिवास अहिरका ने संत दादू के जीवन प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि संत दादू के पास गृहस्थों से मांगकर लाई दो रोटी, लंगोटी, कंबल और करमंडल ही होते थे। वे अपना अधिकतर समय जड़ी-बूटियों से रोगियों की सेवा और झाड़ियां काटने और भजन में बिताते थे। एक अमीर व्यक्ति संत से सुखी रहने का मूल मंत्र पूछने उनके पास आया। उसने उन्हें पहचान न पाकर अपशब्द कहे और कोड़े भी मारे। बाद में पता चला कि वही संत दादू थे, जिससे वह क्षमा मांगने पहुंचा। संत दादू ने कहा कि सुखी रहने का मार्ग संतोष, सदाचार और संयम है। उन्होंने कहा कि अपरिग्रह और सेवा भाव से ही जीवन में शांति मिलती है। भक्तों ने उनके उपदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया बताया गया है। संवाद