फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jind News: 13 साल बाद योजना का नाम बदलकर 132 परिवारों को दिलवाया प्लाॅटों पर कब्जा

विज्ञापन
10जेएनडी26: डीआरडीए हॉल में पात्र लोगों को प्लाटों पर कब्जे का प्रमाण पत्र सौंपते हुए राज्य मंत
विज्ञापन
जींद। कांग्रेस सरकार के समय में इंदिरा आवास योजना के तहत पात्र लोगों को वर्ष 2011 में अलॉट किए गए प्लाटों को अब महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना का नाम देकर मालिकों को कब्जा पत्र दिया गया है। इसके लिए डीआरडीए सभागार में जिला स्तरीय कार्यक्र म कर पोजशन पत्र दिया गया है। इस कार्यक्रम में मुख्यातिथि के तौर पर राज्य मंत्री सीमा त्रिखा ने शिरक्त की।
विज्ञापन


महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत जिले में सोमवार को 132 परिवारों को 100-100 वर्ग गज के प्लाट उनके मालिकों को सौंपें। इसमें जिले के तीन गांवों के पात्र लोगों ने शिरकत की। जिसमें रामराय, शामलो कलां व रायचंद वाला गांव के ग्रामीणों को यह पत्र मिले हैं। लंबे अर्से से भाजपा के शासन काल में दर्जनों बार अनेक गांवों के लोग अपने प्लाटों पर कब्जा लेने की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर काटकर थक चुके थे, लेकिन उस समय में अधिकारियों ने इनकी न सुनी और यह लोग लंबे अर्से से बिना प्लाट पर कब्जा किए। अपना मकान बनाने से वंचित थे। अब इन लोगों का मकान बनाने का सपना पूरा होगा। जिला में जिन परिवारों को प्लॉट मिले हैं। इनकी पहचान पंचायत विभाग द्वारा की गई थी। इस कार्यक्रम में राज्य मंत्री सीमा त्रिखा व डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने कहा कि जिन लोगों के नाम प्लाट थे। उनको कब्जा नहीं मिला था। अब कब्जे का पत्र उन सभी लोगों को दिया गया है, ताकि वह अपने मकान बनाकर अपने परिवार के साथ रह सकें।
सोनीपत में राज्य स्तरीय कार्यक्रम कर प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सैनी सिंह सैनी ने यह पोजशन पत्र देने की शुरूआत की थी। इस योजना के तहत रामराय गांव के 27, गुरथली के 17 और 88 परिवार शामलो कलां के हैं। जिनको पोजशन पत्र दिए गए। इस अवसर पर विधायक कृष्ण मिड्ढा, एडीसी डॉ. हरीश वशिष्ठ, कैथल की एडीसी जय श्रद्धा, एसडीएम अनिल दून, सीईओ जिला परिषद डॉ. किरण सिंह मौजूद रहे।
विज्ञापन

चार बार हो चुकी निशानदेही अब मिले

कार्यक्रम में मौजूद रामराय गांव निवासी रमेश, बिमला व अमन ने बताया कि कांग्रेस की सरकार के समय वर्ष 2011 में उनको यह प्लाट मिले थे। उस समय इनका नाम इंदिरा आवास योजना था, जबकि अब लंबा समय बीतने के बाद प्लाट का नाम बदलकर महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती रखा गया है। उस समय इन प्लाटों की रजिस्ट्री उनके नाम थी, लेकिन कब्जा नहीं दिलवाया गया था। जिसके लिए वह बीते 13 वर्षो में दर्जनों बार जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगा चुके थे। उनकी कहीं पर भी सुनवाई नहीं हुई थी। अब सरकार ने उनको प्लाट पर कब्जे का प्रमाण पत्र दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें