संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। साइबर थाना की टीम ने ऑनलाइन ठगी के मामले में पांच आरोपियों को काबू किया है। उन्होंने ओएलएक्स पर विज्ञापन देकर एचडीएफसी बैंक में नौकरी लगवाने के नाम पर एक लाख चार हजार 800 रुपये की धोखाधड़ी की थी। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ कर उनके कब्जे से 12 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप व 85 हजार रुपये बरामद किए हैं।
डीएसपी रोहताश ढुल ने प्रेसवार्ता में बताया कि 10 मई को निडाना गांव निवासी सुमित ने साइबर थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया गांव की शाखा में खाता है। एक मई को उसने फोन पर ओएलएक्स पर एचडीएफसी बैंक में नौकरी से संबंधित विज्ञापन देखा। उसके क्लिक करने पर उसका मोबाइल नंबर मांगा गया। इसके बाद आरोपियों ने उससे दस्तावेज मांगे जो व्हाट्सएप पर भेज दिए गए। फोन-पे के माध्यम से 272 रुपये फीस के रूप में लिए गए थे। इसके बाद उससे नौकरी के नाम पर और राशि की मांग की गई।
एक मई से लेकर नौ मई तक दो ट्रांजेक्शन के माध्यम से एक लाख 4898 रुपये आरोपियों को भेज दिए गए। उसके बाद आरोपियों ने एचडीएफसी बैंक में व्हाट्सएप पर कैशियर के पद का नियुक्ति पत्र भेज दिया था। साइबर थाना पुलिस ने सुमित की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी फर्जीवाड़े का सहारा लेने समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। इसके बाद साइबर थाना की टीम ने पांच आरोपियों को काबू कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान गांव खानपुर कलां निवासी अमित मलिक, सागर, गांव शामड़ी निवासी राहुल, विनय तथा गांव धनश्री चरखी दादरी निवासी सोनू के तौर पर हुई। आरोपियों को गिरफ्तार करके पांच दिन का रिमांड लिया।
रिमांड के दौरान आरोपी अमित से चार मोबाइल फोन, लैपटॉप, पचास हजार रुपये, आरोपी सोनू से दो मोबाइल फोन और नौ हजार रुपये, आरोपी राहुल से दो मोबाइल और नौ हजार रुपयेे, आरोपी विनय से तीन मोबाइल फोन, आठ हजार रुपयेे, आरोपी सागर से दो मोबाइल फोन व आठ हजार रुपये बरामद किए है।
एक आईडी पर दो सिम जारी करता था आरोपी अमित
पूछताछ में आरोपी अमित ने बताया कि उसने गोहाना में मनी ट्रांसफर, मोबाइल और सिम बेचने की दुकान की हुई थी। जब कोई सिम लेने आता तो वह ग्राहक के नाम से दो सिम जारी कर लेता था। एक ग्राहक को दे देता था और दूसरी अपने पास रखा लेता था। इसके बाद वह सिम का प्रयोग कर लोगों को नौकरी लगवाने का झांसा देते थे और फिर उनसे राशि ऐंठ लेते थे। उन्होंने यह काम छह महीने पहले शुरू किया था। आरोपी अमित और उसकी टीम ओएलएक्स पर एड देती थी जो मुकेश ने नाम से एड डाली जाती थी, जिसका मासिक किराया करीब 11 हजार रुपये था। इसका भुगतान आरोपी अमित स्वयं ही करता था।
आरोपी अमित ने सभी आरोपियों को अलग-अलग क्षेत्र बांटा हुआ था। इससे जो भी पैसा आता उसमें से अमित 50 प्रतिशत हिस्सा लेता था, बाकी 50 प्रतिशत दूसरे साथियों को देता था। इनके खिलाफ एक शिकायत उत्तर प्रदेश की भी मिली है, जिसकी जांच चल रही है।