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Haryana: गांव दुड़ाना के 300 युवक-युवती रोजगार के लिए हो गए परदेसी, मगर वापस आने पर नहीं हो रहे सहमत

Mon, 23 Oct 2023 12:36 PM IST
रोहतक ब्यूरो प्रमोद राठी, जींद (हरियाणा)

सार

हरियाणा के युवक और युवतियों में विदेश पहुंच कर पढ़ाई करने और वहां नौकरी करने का अलग से जोश दिखने लगा है। ऐसा ही जींद के दुड़ाना गांव में दिखने को मिल रहा है। जिसकी आबादी लगभग 3500 है। गांव के इक्का-दुक्का को छोड़कर अधिकतर युवा कनाडा, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, पुर्तगाल और इंग्लैंड में रहने लगे हैं। 
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जींद जिले का गांव दुड़ाना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जींद के गांव दुड़ाना के 300 से ज्यादा युवक-युवतियों ने रोजगार पाने के लिए अपनी सरजमीं छोड़ दी है। इस गांव के 18 से 45 साल के युवक-युवतियां विदेशों में बस गए हैं। नतीजतन गांव के बड़े-बड़े मकान खाली से दिखने लगे हैं। कुछ मकानों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग ही रहते हैं, जबकि उनके घरों के युवक-युवतियां विदेशों में पैसे कमाने निकले हुए हैं। अब तो इस गांव के लगभग हर घर से कोई न कोई विदेश चला गया है।

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दुड़ाना गांव की आबादी लगभग 3500 है। गांव के इक्का-दुक्का को छोड़कर अधिकतर युवा कनाडा, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, पुर्तगाल और इंग्लैंड में रहने लगे हैं। इस गांव की 30 प्रतिशत आबादी सिख परिवारों की है। गांव में कई घर तो ऐसे हैं, जिनके सभी युवा विदेशों में हैं। गांव के बड़े-बुजुर्ग विदेशों से अपने बेटा-बेटी के आने के इंतजार में जीवन यापन कर रहे हैं।

युवक-युवती विदेशों से अपने घर पैसे भी खूब भेज रहे हैं, लेकिन वह वापस आने के लिए तैयार नहीं है। गांव वाले उनके घरों के युवाओं के विदेशों में बसने के लिए यहां अच्छा रोजगार न होना बता रहे हैं। युवा पढ़-लिखकर नौकरी लगने के काबिल भी हो चुके हैं, लेकिन उन्हें समय पर नौकरी नहीं मिल पा रही है। इसको लेकर युवाओं का अब विदेशों की तरफ रुझान हो गया है।
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इस परिवार से 12-13 बच्चे गए हैं विदेश
गांव के तेजा सिंह का कहना है कि उनके परिवार में 35 सदस्य हैं, जिनमें से 12-13 युवक-युवतियां विदेश गए हैं। उनके भी दोनों बच्चे विदेश में हैं। बेटी केयूके से बीए टॉपर है। उसे दो महीने पहले ही कनाडा भेजा है। उसे वहीं रोजगार मिल गया है।

बेटे और पौत्रों के बच्चे रह रहे घर
बुजुर्ग जसंवत सिंह का कहना है कि उनके परिवार से तीन लड़के और पौत्र बहू विदेश गए हुए हैं। उनके तीन बेटे अमेरिका में रह रहे हैं और पौत्र की बहू इंग्लैंड में रह रही है। गांव में बेटों की बहू, बच्चे और वह रहते हैं। गांव से हर माह से एक या दो युवक-युवती विदेश चले जाते हैं। गांव में बड़ी-बड़ी कोठियां तो हैं, लेकिन बिना बच्चों के खाली-खाली हैं। विदेश जाकर बच्चे पैसे तो भेज रहे हैं, लेकिन वापस आने को तैयार नहीं।

गांव के सरपंच के अनुसार
गांव से युवक-युवतियां रोजगार के लिए इंग्लैंड, पुर्तगाल, आस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका गए हैं। गांव के युवा अच्छे पढ़े-लिखे हैं, लेकिन यहां नौकरी नहीं मिल रही। इसको लेकर पढ़े-लिखे युवक-युवतियां रोजगार पाने के लिए विदेशों की तरफ रुख कर रहे हैं। सरबजीत कौर, सरपंच, दुड़ाना।

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