छात्र-कान्हाकक्षा-तीसरीराजकीय प्राथमिक विद्यालय कर्मगढ़फोटो 07जेएनडी27
जींद-गोहाना मार्ग पर शहर के साथ लगता गांव पांडू पिंडारा एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पूर्वजों, रिश्तेदारों और युद्ध में मारे गए सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए यहां पिंडदान और तर्पण किया था। इसी मान्यता के चलते इस स्थान का नाम पांडू पिंडारा पड़ा। पांडू पिंडारा को पिंडतारक तीर्थ और सोम तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए इस तीर्थ का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार, पांडवों ने यहां 12 वर्षों तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा करते हुए तपस्या की थी। आज भी सोमवती अमावस्या पर यहां बड़ा मेला लगता है। श्रद्धालु पवित्र सरोवर में स्नान कर अपने पितरों के लिए पिंडदान करते हैं।
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