04जेएनडी13: कार्यस्थल का निरीक्षण करते चेयरमैन डॉ संजय जांगड़ा। स्रोत: कालोनीवासी
जींद। जिले में मंगलवार को 1300 मीट्रिक टन डीएपी की खेप पहुंची। अब तक जिले में 14,000 मीट्रिक टन डीएपी आ चुका है। किसानों को डीएपी उर्वरक की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। कृषि व किसान कल्याण विभाग डीएपी उपलब्ध करवाने के लिए गंभीर है। इसके अलावा पराली जलाने के दुष्प्रभावों के प्रति किसानों में बढ़ी हुई जागरूकता के कारण जिले में किसानों की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन (तकनीकों को अपनाया जा रहा है जिसके परिणामस्वरूप जिला जींद में पराली जलाने की घटनाओं में लगभग 45 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। कृषि विभाग की ओर से धान की पराली प्रबंधन के लिए किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ का प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है जिससे किसान फसल अवशेष प्रबंधन अपनाने के लिए और अधिक प्रेरित हो रहे हैं। कृषि उपनिदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने किसानों से आह्वान है कि वे मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपना पंजीकरण अवश्य करवाएं, ताकि विभाग द्वारा समय पर उर्वरक एवं अन्य कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
04जेएनडी13: कार्यस्थल का निरीक्षण करते चेयरमैन डॉ संजय जांगड़ा। स्रोत: कालोनीवासी