जुलाना। कस्बे की नई अनाजमंडी में सरसों की खरीद का काम शुरू हो गया। पहले दिन 846 क्विंटल सरसों पहुची लेकिन केवल 63 क्विंटल सरसों ही सरकारी दर पर खरीदी गई। जिन किसानों ने फसल बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कराया था उन्हें मजबूरन प्राइवेट व्यापारियों को सरकारी दर से कम पर सरसों बेचनी पड़ी। कुछ किसानों की सरसों में नमी अधिक होने की वजह से कम दाम में बेचना पड़ा। पिछले साल अब तक इससे डबल 1686 क्विंटल पहुंची थी।
स्थानीय मंडी में मार्केट कमेटी ने सरसों की खरीद के लिए इंतजाम किए थे। पहले दिन काफी किसान सरसों बेचने भी पहुंचे। मार्केट कमेटी के सचिव ने सुरेश खोखर ने बताया कि मंडी में किसानों की सरसों की फसल के लिए सभी पुख्ता इंतजाम करवाए गए हैं। मंडी में अब तक केवल 846 क्विंटल सरसों ही पहुंची है। मंडी में केवल उन किसानों की सरसों खरीदी गईं जिन्होंने पंजीकरण करा लिया था। बहुत से वह भी किसान पहुंचे जिन्होंने फसल बेचने के लिए पंजीकरण नहीं करा रखा था इस वजह से इन किसानों की सरसों सरकारी केंद्र पर नहीं ली। कुछ किसानों की फसल में नमी अधिक थी। नियमानुसार 8 प्रतिशत से कम नमी पर ही खरीद हाे रही है लेकिन इससे अधिक होने पर नहीं ली जाएगी। ऐसे में किसानों को मजबूरन प्राइवेट आढ़तियों के यहां सरकारी दर से कम पर फसल बेचनी पड़ी। सरकारी दर 5450 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि प्राइवेट में केवल 4769 प्रति क्विंटल पर बेचना पड़ा। किसानों के पंजीकरण न कराने की वजह से उन्हें मजबूरन सरकारी दर से ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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सत्यापन के अभाव में पोर्टल पर नहीं चढ़ा रिकॉर्ड
सरसों की फसल को ऑनलाइन पंजीकरण न करवाने पर प्राइवेट खरीद पर बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जिससे उन्हें काफी नुकसान हो रहा है। जिन किसानों ने ऑनलाइन पंजीकरण करवाया है केवल वही किसान सरकारी रेट पर सरसों बेच सकते हैं। काफी किसान ऐसे भी है जिन्होंने ऑनलाइन पंजीकरण तो करवा दिया लेकिन अभी तक पटवारी ने सत्यापन नही किया है। ऐसे में किसानों की सरसों को पोर्टल पर नही दिखाया जा रहा है। किसान कार्यालय और तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं। किसानों की मांग है कि उनकी फसल बिना ऑनलाइन किए सरकारी रेट पर खरीदी जाए।
वर्जन
किसानों की सरसों की फसल बेचने के लिए प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मंडी में बिजली पानी के प्रबंध किए गए हैं। किसान जब भी मंडी में फसल लेकर आएं तो सुखाकर लाएं ताकि उनकी फसल के सही भाव मिल सकें। पूरे मापदंड करने पर ही एमएसपी रेट पर सरसों की फसल बिकेगी।
- सुरेश खोखर, मंडी सचिव जुलाना।