जींद। फरवरी 2016 से जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज हुए मुकदमों में काफी युवाओं को अब पौने सात साल बाद राहत मिली है। जिले में इस दौरान 33 मुकदमे चल रहे थे। इनमें से 29 मामलों को अदालत ने खारिज करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
फरवरी 2016 में हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जिले में कई आगजनी की घटनाएं हुई थीं, जिसमें यह मामला दर्ज हुए थे। फिलहाल जुलाना में एक, पिल्लूखेड़ा में तीन मामले बच गए हैं, जो अदालत में विचाराधीन हैं। यह चारों मामले हत्या के प्रयास के हैं। जींद में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान फरवरी महीने में धरना चला था। इसमें रोहतक में सबसे पहले आगजनी हो गई थी। इसके बाद यह आग जींद में भी भड़क गई थी। जींद में कई स्थानों पर आगजनी हुई थी। पिल्लूखेड़ा थाना में भी आगजनी हुई थी और पुलिस के हथियारों को लोगों ने लूट लिया था। लगभग तीन महीने जींद में धरना भी चला था। 16 फरवरी 2016 को अचानक आंदोलन हिंसक हो गया था। इस दौरान जींद के 33 युवाओं पर अलग-अलग मामले दर्ज हुए। इनमें से उचाना में 13, पिल्लूखेड़ा में 18, जुलाना में दो मामले रहे गए थे जबकि इससे पहले जींद के युवाओं पर मामले खारिज हो गए थे। बुधवार को इन सभी मामलों पर सुनवाई हुई। इनमें से उचाना के सभी 13 मामलों की सुनवाई में यह खारिज कर दिए और इसमें सभी आरोपी युवाओं को बरी किया गया। इसी प्रकार पिल्लूखेड़ा में 18 मामले दर्ज थे, जिनमें से 15 को खारिज किया गया। पिल्लूखेड़ा में अब तीन मामले बच गए हैं। वहीं जुलाना में दो में से एक मामला खारिज किया गया। इन मामलों में काफी युवाओं छह-छह महीने तथा कुछ आठ-आठ महीने तक जेल में रहे।