अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति और सरकार के बीच हुए समझौते के दो मामले उनकी अध्यक्षता वाली कमेटी को सौंपे गए थे। इसमें 60 दिन की समयावधि निश्चित की गई थी। उन्होंने दोनों मामलों को 58 दिन में ही निपटा दिया था। शनिवार को एक निजी कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए बेदी ने कहा कि उनकी अध्यक्षता वाली कमेटी को जाट आरक्षण आंदोलन में मारे गए लोगों के परिजनों को नौकरी देने तथा मुआवजा देने के दो मामले सौंपे गए थे। इस कमेटी को 60 दिन का समय मिला था। बेदी ने बताया कि उन्होंने 58 दिन में सभी जाट आरक्षण आंदोलन के पीड़ित 30 लोगों को उनके घर के पास ही नौकरी मुहैया करवा दी तथा लगभग सभी लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है। उन्होंने पीड़ित लोगों से अपने-अपने जिले के डीसी के माध्यम से आवेदन करने को कहा था। एक-दो पीड़ित परिवार को कागजात पूरे नहीं होने पर मुआवजा मिलने में देरी हुई। मुख्यमंत्री के घोषित विकास कार्यों में हो रही देरी पर बेदी ने कहा कि प्रदेश में अधिकतर अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं। इसलिए कुछ देरी हो रही है। जींद में विकास कार्यों के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं और सभी कार्यों पर जल्दी काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा पिछली सरकार ने अपने 10 साल के शासनकाल के दौरान कोई नई भर्ती नहीं की और केवल डीसी रेट पर अधिकारी व कर्मचारी लगाकर कार्य किया। इसलिए प्रदेश में अधिकतर पद खाली पड़े हैं।
60 दिन की बजाय 58 दिन में निपटाया काम : बेदी