दनौदा के छोरे का माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए चयन
अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना। व्यक्ति की आर्थिक हालत कैसी भी हो, लेकिन उसमें कुछ कर गुजरने की ललक उसे आगे ले ही जाती है। इसी जिद और पक्के इरादे से दुनिया में देश का नाम रोशन के लिए प्रयासरत है गांव दनौदा का पर्वतारोही सचिन दनौदा है। जिसकी लगन और संघर्षशील के कारण उसका चयन दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतेह करने के लिए हुआ है। सचिन के मार्गदर्शक मा. राजा राम शर्मा ने बताया कि गांव दनौदा के सचिन ने गरीबी को अभिशाप न मानते हुए अपनी लगन और मेहनत से दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत पर चढ़ाई के लिए चयन करवाकर यह साबित कर दिया कि यदि इंसान सच्ची लगन और मेहनत से किसी कार्य को करे, तो वह अवश्य पूरा होती है। उन्होंने बताया कि माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई में करीब 30 लाख रुपये खर्चा आता है, लेकिन आर्थिक परेशानी के चलते वह अपने सपने को साकार नहीं कर पाया था, लेकिन अब उसकी मेहनत रंग लाई है, और वह दुनिया की सबसे ऊंचे पर्वत पर तिरंगा लहराने का सपना संजोए हुए हैं। उन्होंने बताया कि सचिन अब तक हिमालय की सात ऊंची चोटियों को फतेह कर चुका है, जिसमें सिक्किम हिमालय की 16000 फुट की ऊंचाई पर स्थित माउंट रिनोक, 17500 फुट ऊंची माउंट कोकथांग, हिमाली की 18000 फुट की ऊंचाई वाली काबरूडोम, सिक्किम में ही स्थित 19234 फुट ऊंची माउंट फरेह को फतेह कर चुका है। इतना ही नहीं गड़वाल हिमालय की 20000 फुट ऊंची माउंट भागीरथी को 2 बार फतेह कर चुका है। इसके अतिरिक्त गत जुलाई मास में उसने कन्या कुमारी से खारदुंगला कश्मीर तक की साइकिल से 4077 किमी यात्रा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और पर्यावरण संरक्षण को लेकर की।
26जेएनडी 33 : सचिन का फोटो।