साल्हावास। पेरिस ओलंपिक में भारतीय महिला पहलवान विनेश फौगाट को मैच से पहले अयोग्य करने पर कुश्ती प्रेमियों व खिलाड़ी के प्रशंसकों में गुस्सा है। वहीं विनेश फौगाट भी इससे पूरी तरह टूट गई और उन्होंने कुश्ती को अलविदा कह दिया। वहीं अखाड़ा संचालकों का कहना है कि ओलंपिक तक का सफर एक पहलवान के लिए बड़ा कठिन भरा सफर होता है। विनेश ने अपने जीवन का अधिकतर समय कुश्ती में लगाया और अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन अंत में जो घटनाक्रम घटित हुआ वह सबको व्यथित कर देने वाला है।
बुधवार सुबह जैसे ही पता चला कि विनेश फौगाट को अयोग्य कर दिया गया है तो बहुत कष्ट हुआ। पूरा दिन मन बड़ा दुखी रहा। इस बार वह देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर आने वाली थी।
- कैप्टन जोरा सिंह, अखाड़ा संचालक
विनेश चरखी दादरी के छोटे से गांव बलाली से निकलकर पेरिस तक पहुंची। उसका सफर आसान नहीं रहा। वह संघर्षों के बाद में ओलंपिक में पहुंची थी। रियो ओलंपिक में चोट के बाद वापसी की बचपन में पिता को खो दिया। इतने कष्ट सहने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी वास्तव में विनेश फौगाट चैंपियन है।
- कृष्ण पहलवान, अखाड़ा संचालक
स्पोर्ट स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। विनेश के साथ जो भी स्टाफ सदस्य गए हुए थे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने अपने कर्तव्य का वहन ईमानदारी से नहीं किया। इसी कारण यह समस्या उठानी पड़ी।
- सतीश पहलवान, अखाड़ा संचालक
विनेश फौगाट को कम से कम स्वर्ण पदक अवश्य मिलना चाहिए। वास्तव में वह इसकी हकदार है। विनेश को अयोग्य करके उसके साथ अन्याय किया गया है। यह पहलवानों के लिए सबसे बड़ी दुख की खबर है।
- सज्जन मंदौला, कोच, कुश्ती