बादली। मार्च में ही गांवों में पेयजल की समस्या बढ़ने लगी है। क्षेत्र के गांव पेलपा, निमाना और देवरखाना गांव की ही बात की जाए तो पचास प्रतिशत हिस्से में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। महिलाओं को दूर दराज से सिर पर मटका रखकर पानी भरना पड़ रहा है जबकि पीने का पानी तो खरीद कर प्यास बुझानी होती है।
ग्रामीण संतरा, मूर्ति, दीपक और सोनू का कहना है कि मूलभूत सुविधाओं के लिए भी नेताओं के सामने हाथ जोड़ने पड़ रहे हैं क्योंकि आजादी के 76 साल बाद भी गांवों में आज भी पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं हैं। गांव की महिलाएं सुबह होते ही अपने घरों से सिर पर मटका लेकर निकलती हैं और दूर-दूर से पानी भर कर लाती हैं। देवरखाना गांव की महिलाओं को पानी के लिए गुरुग्राम रोड पर हैंडपंप पर जाना होता है। पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए पब्लिक हैल्थ वालों ने पानी की लाइन बिछाई हुई है मगर लेवल ठीक न होने के कारण कुछ ही घरों तक पानी पहुंच पाता है जबकि शेष बचे गांववासियों को पानी के टैंकर का इंतजार करना पड़ता है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें तो गर्मियों के नाम से भी डर लगता है क्योंकि गर्मियों के मौसम में पानी की खपत सर्दी की अपेक्षा कई गुना बढ़ जाती है। महिलाओं का कहना है कि गर्मी के मौसम में पैसों से खरीदा गया मटका भर पानी पर्याप्त नहीं है। वहीं जलघरों में कच्चे पानी की सप्लाई जीडब्ल्यूएस माइनर से होती है लेकिन वर्तमान समय में माइनर में पानी का लेवल कम हो गया है।