बहादुरगढ़। रोहद के ग्रामीणों ने ट्रांसफर ड्राइव के दौरान अध्यापकों के पद कैप्ट करने के विरोध में मंगलवार की सुबह सरकारी स्कूल पहुंचकर अपने बच्चों को बाहर निकाल गेट पर ताला लगा दिया। उन्होंने सभी अध्यापकों के पद बहाल रखने और नियुक्तियां करने की मांग की।
ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई पहले ही कोविड महामारी की वजह से प्रभावित रही और अब शिक्षकों के तबादले किए जाने से उनका भविष्य अंधकारमय बन जाएगा। चेताया कि यदि सरकार ने हठधर्मिता रखी तो वे अनिश्चितकालीन स्कूल गेट पर ताला लगा देंगे। मंगलवार को रोहद गांव के काफी ग्रामीण एकत्रित होकर स्कूल में पहुंचे। ग्रामीणों का विरोध ट्रांसफर ड्राइव व रेशनलाइजेशन को लेकर था। ग्रामीण आवेश में आ गए और उन्होंने स्कूल गेट पर ताला जड़ दिया। विरोध के दौरान ग्रामीण छात्रों के साथ स्कूल के गेट के बाहर धरने पर भी बैठे और नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना था कि अध्यापकों के तबादले के बदले सरकार को स्कूल में अध्यापक भेजने होंगे। तभी उनका विरोध थमेगा। उन्होंने यह भी कहा कि रोहद के प्राइमरी स्कूल में 300 छात्रों पर सिर्फ एक अध्यापक है। सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 500 से ज्यादा छात्र हैं, लेकिन अध्यापक फिर भी कम हैं। ग्रामीण सतीश प्रधान, बलवान, भोलू, राजेश समेत कई अन्य का कहना था कि यदि सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो फिर वे अनिश्चितकाल के लिए स्कूल पर ताला जड़ देंगे।
छात्राओं ने कहा कि पहले ही कोरोना की वजह से उनका काफी नुकसान हो चुका है। अब शिक्षक ही स्कूल में नहीं रहेंगे तो उन्हें कौन पढ़ाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से उनके अध्यापकों का तबादला रोकने या उनके स्थान पर नए शिक्षक स्कूल में भेजने की मांग की है। बता दें कि हाई स्कूल से हिंदी, अंग्रेजी समेत कई विषयों के अध्यापकों का तबादला हो रहा। ट्रांसफर ड्राइव में अध्यापकों की पोस्ट कैप्ट करने से यह विवाद बढ़ा है। उधर ग्रामीणों द्वारा प्राइमरी व राजकीय कन्या उच्च विद्यालय स्कूल के गेट पर ताला जड़ने की सूचना मिलने पर आसौदा थाना प्रभारी निरीक्षक जसबीर भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया। ग्रामीणों ने करीब एक ंघंटे तक रोष जताने के बाद स्कूल से ताला खोल दिया। जिसके बाद बच्चे व शिक्षक भी स्कूल के अंदर पहुंचे।