-फोटो 53 : जैन मंदिर में उत्तम सत्य धर्म की पूजा करते श्रद्धालु।
बहादुरगढ़। विश्व शांति और कल्याण के महापर्व पर्युषण दशलक्षण पर्व का 5वां दिन उत्तम सत्य धर्म की पूजा के साथ शुरू हुआ। इसमें पुष्पदंत भगवान, पार्श्वनाथ भगवान की पूजा के साथ 108 अर्घ्य समर्पित करते हुए बताया गया कि जो सत्य पर अटल है वही साधक है। ईश्वर को अंतिम सत्यमानना ही उत्तम सत्य है। श्री पद्म प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्यूषण महापर्व के 5वें दिन उत्तम सत्य धर्म के रूप में मनाया गया। दीप विधान का पाठ करते हुए उत्तम सत्य धर्म की पूजा एवं पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया गया।
जैन समाज प्रधान सुनील जैन ने बताया कि आज उत्तम सत्य धर्म का दिन है। जहां क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच आत्मा का स्वभाव है। वहीं सत्य संयम तप त्याग इन गुणों को प्रगट करने के उपाय हैं या कहें कि ये वो साधन हैं जिनसे हम आत्मिक गुणों की अनुभूति और प्रकट कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ बनने से जरूरी है श्रेष्ठ कार्य करना।
जैन शास्त्रों में सत्य का अर्थ मात्र ज्यों का त्यों बोलने का नाम सत्य नहीं है, बल्कि हित-मित-प्रिय वचन बोलने से है। हितकारी वचन यानि जिसमें जीव मात्र की भलाई हो। कहने का अभिप्राय ये है कि जिन वचनों से यदि किसी जीव का अहित होता हो तो वे वचन सत्य होते हुये भी असत्य ही है। मित यानि मीठा बोलो अर्थात् कड़वे वचन , तीखे वचन, व्यंग्य परक वचन, परनिंदा, पीड़ा कारक वचन सत्य होते हुये भी असत्य ही माने गए हैं। प्रिय वचन यानि जो सुनने में भी अच्छे लगे, ऐसे वचन ही सत्य वचन हैं।
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