झज्जर। शहर के बाईपास पर पशु चिकित्सालय की इमारत को कंडम घोषित हुए करीब आठ माह हो चुके हैं। इसके बावजूद पशु चिकित्सालय इसी भवन में ही चल रहा है। यहां कार्यरत कर्मचारी व चिकित्सक जान जोखिम में डाल कर पशुओं का इलाज कर रहे हैं। विभाग की लापरवाही के कारण किसी भी समय कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
इस भवन की छत से लेंटर के टुकड़े झड़ कर गिर रहे हैं और जंग लगे सरिए साफ नजर आ रहे हैं। बारिश के दौरान यह भवन कभी गिर सकता है। अपनी जान की परवाह न करते हुए पशु चिकित्सक कंडम भवन में ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं, क्योंकि अन्य कहीं पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। वर्तमान समय में भी 5 से 6 पशु चिकित्सक व कर्मचारी इस भवन में बैठकर पशुओं का इलाज कर रहे हैं।
इस पशु चिकित्सालय की करीब दो एकड़ भूमि है। लेकिन तीन से चार कमरों में ही पशु चिकित्सालय चल रहा है। हालांकि यहां मूलभूत सुविधाओं की कमी खल रही है।
अधिकारी बोले- जारी है टेंडर प्रक्रिया
पशु चिकित्सालय निर्माण के लिए करीब साढ़े छत्तीस लाख रुपये का टेंडर चल रहा है। जल्द ही चिकित्सालय का भवन बनाने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। झज्जर शहर में काफी पशुपालक हैं और कई डेरियां भी हैं। इसके अलावा आसपास के दर्जनों गांव के पशुपालक झज्जर शहर के पशु चिकित्सालय में अपने पशुओं की बीमारी का इलाज करवाने के लिए प्रतिदिन आते हैं।
वर्जन :
पशु चिकित्सालय को बनाने के लिए टेंडर पास कर दिया गया है। जल्द ही चिकित्सालय बनकर तैयार हो जाएगा। पुराने भवन को कंडम घोषित कर दिया गया है, इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
- डॉ. मनीष डबास, उपनिदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, झज्जर