झज्जर। झज्जर के गांव छप्पार की बेटी दीक्षा डागर को सोमवार को दिल्ली में अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा गया। दीक्षा का परिवार इसका गवाह बना। राष्ट्रपति के हाथ से पुरस्कार पाकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। छह साल की छोटी सी उम्र में मैदान संभालने वाली बेटी की कामयाबी पर पूरा छप्पार गांव खुद को गौरवांवित महसूस कर रहा है। आज गांव में दीक्षा का भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। दीक्षा को मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने भी सोशल मीडिया पर बधाई दी है।
नई दिल्ली में मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दीक्षा को अवार्ड देकर सम्मानित किया। दीक्षा डागर बाएं हाथ की गोल्फर है। मंगलवार को अवार्ड पाकर दीक्षा काफी उत्साहित दिखी। अपने परिवार के साथ अवार्ड लेने के लिए पहुंची थी। उसने इसके लिए अपने कोच, परिवार, भारतीय गोल्फ संघ, डब्ल्यूजीएआई, भारतीय खेल प्राधिकरण का आभार जताया है। दीक्षा ने बताया कि इस तरह के पुरस्कार मिलने से हौसला बढ़ता है और अच्छा करने का दबाव भी बनता है। उसने बताया कि साल 2023 उसके लिए काफी अच्छा रहा है। वह ओलंपिक के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। दीक्षा ने बताया कि इस साल फरवरी में यूरोपियन टूर्नामेंट से खेल की शुरुआत करेंगी। यह खेल केन्या में होंगे। उसके बाद पूरा साल व्यस्त रहेंगी। दीक्षा के पिता नरेंद्र डागर, मां सुनीता डागर सहित पूरे परिवार ने खुशी जताई है और कहा कि बेटी को इस अवार्ड से प्ररेणा मिलेगी और भी बेहतर खेलेगी। उन्होंने बताया कि बुधवार को छप्पार गांव में बेटी दीक्षा डागर का सम्मान समारोह होगा। इसमें ग्रामीणों की तरफ से उसे सम्मानित किया जाएगा।
छह साल की उम्र से खेल रहीं गोल्फ
दीक्षा 6 साल की उम्र से ही गोल्फ खेल रही हैं। वह सुनने में अक्षम हैं, लेकिन अपनी प्रतिभा से उन्होंने देश का मान बढ़ाया है। दीक्षा डागर भारत की प्रतिष्ठित महिला गोल्फरों की विशिष्ट श्रेणी में हैं। पिता नरेंद्र डागर ने बताया कि 12 साल की उम्र में ही दीक्षा ने नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। 2015 में उन्होंने पहली बार भारत का प्रतिनिधित्व किया। जब वह 18 साल की थीं तब उन्होंने साउथ अफ्रीकन ओपन का खिताब अपने नाम किया। 2020 के टोक्यो ओलंपिक में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। 2023 में दीक्षा ने अभी तक 22 देशों में आयोजित 29 प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
माता-पिता ने दिया माहौल, मार्गदर्शन कर बढ़ाया हौसला
पिता कर्नल नरेंद्र डागर खुद पूर्व गोल्फर रहे हैं और उन्होंने ही दीक्षा का मार्गदर्शन किया है। एक ऐसा माहौल तैयार किया, जिससे गोल्फ और अन्य खेलों के प्रति उसके जुनून को बढ़ावा मिला। दो साल पहले जब वह गोरखपुर आए, तब दीक्षा ने रेलवे गोल्फ क्लब की सदस्यता ली और यहां प्रैक्टिस करने लगीं। जब भी दीक्षा किसी प्रतियोगिता में प्रतिभागिता करती हैं तो उनकी मां सुनीता डागर हमेशा उनके साथ रहती हैं। भाई योगेश डागर भी गोल्फ के खिलाड़ी हैं।