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Jhajjar-Bahadurgarh News: बेरी, बहादुरगढ़ में टिकट वितरण, बादली में अति उत्साह बना भाजपा की हार का कारण

Wed, 09 Oct 2024 04:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
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झज्जर। आखिरकार मंगलवार को चुनाव परिणाम आ गए। जिले की चार में से तीन सीट कांग्रेस और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।
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कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले झज्जर जिले में पहले से ही माना जा रहा था कि चारों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों को हरा पाना आसान नहीं होगा और वह भी तब, जब 137 दिन पहले हुए लोकसभा चुनाव में चारों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी ने अच्छे मार्जन से जीत हासिल की थी।
सीटवार बात करें तो बेरी और बहादुरगढ़ विधानसभा सीट पर भाजपा का टिकट वितरण सही नहीं करना भी मुख्य कारण रहा। इस वजह से बेरी में तो कई भाजपाई त्याग पत्र देकर कांग्रेसी हो गए और एक ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। चुनाव परिणाम में भी यह साफ नजर आया कि बेरी विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी संजय कबलाना के मुकाबले निर्दलीय प्रत्याशी अमित डीघल 18 राउंड में दूसरे नंबर पर रहा, जबकि केवल अंतिम राउंड में भाजपा प्रत्याशी को नाममात्र की बढ़त मिली, जिसके बाद वह दूसरे नंबर पर पहुंच सके। यहां टिकट वितरण सही हुआ होता और पार्टी ने अपने नेताओं का डैमेज कंट्रोल किया होता तो आज स्थिति कुछ बेहतर हो सकती थी।
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बहादुरगढ़ विधानसभा सीट पर भी भाजपा ने पूर्व विधायक नरेश कौशिक को टिकट न देकर उनके भाई दिनेश कौशिक को टिकट दिया। इस कारण शुरुआत में नरेश कौशिक नाराज रहे, जिसका गलत मैसेज गया। हालांकि बाद में नरेश कौशिक मान गए और भाई के साथ वोट भी मांगे, लेकिन यहां शुरुआती डैमेज कंट्रोल को पार्टी संभाल नहीं पाई। रही बात कांग्रेस की तो निर्दलीय चुनाव जीतकर आए राजेश जून खुद कांग्रेस से टिकट मांग रहे थे, लेकिन उनको टिकट न देकर विधायक राजेंद्र जून को टिकट दी गई। इसके चलते राजेश जून के साथ लोगों की सहानुभूति जुड़ती गई और जनता ने इसका तोहफा जीत के साथ दिया।
बादली विधानसभा सीट इस बार जिले की हॉट सीट थी। उम्मीद थी कि ओमप्रकाश धनखड़ को इस बार लोगों का साथ मिलेगा, लेकिन ऐसा देखने को नहीं मिला। अपने खुद के गांव से ही धनखड़ को नाममात्र की वोटों से लीड मिली। पाटौदा में जहां देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रैली की, वहां भी कुछ खासा प्रभाव देखने को नहीं मिला। लोगों के बीच न होना इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।
झज्जर विधानसभा सीट की बात करें तो यहां पर भाजपा प्रत्याशी को हर बार की तरह शहरी क्षेत्र के लोगों का तो हाथ मिला, लेकिन गांव में भाजपा मजबूती नहीं पकड़ पाई। भाजपा प्रत्याशी कप्तान बिरधाना जिला परिषद के चेयरमैन भी हैं और गांवों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। चुनाव प्रचार के दौरान गांवों में भीड़ तो उमड़ी, लेकिन वोट भाजपा की बजाय कांग्रेस को गए।
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कांग्रेस के लिए भी चिंता
बेशक तीन सीटों पर चुनाव कांग्रेस जीती हो, लेकिन बेरी को छोड़कर दो सीटों पर जीत का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। झज्जर विस सीट से केवल 12979 वोटों और बादली विस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी ने 16820 मतों से ही जीत हासिल की है। झज्जर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी ने 2019 में 14999 मतों और बादली सीट से 11245 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। बादली से लगभग पिछले बार के मुकाबले 5 हजार वोटों की ही बढ़त मिली है।
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