बहादुरगढ़। उद्योग नगरी बहादुरगढ़ के रेलवे स्टेशन को अति सुंदर व आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाकर विश्वस्तरीय स्टेशन बनाने का काम धीमी गति से चल रहा है। शुरुआत का कार्य तेज गति से किया गया, लेकिन अब कई महीनों से यह कार्य कछुआ गति से चल रहा है।
वर्ष 2025 तक इस कार्य को पूरा किया जाना है और इसमें अभी सात महीने का समय है। कार्य की गति के अनुसार इसके समय पर पूरा होने पर संदेह है।आगामी दिसंबर व जनवरी में सर्दी के चलते काम की गति और कम होगी। जबकि यह कार्य अमृत भारत योजना के तहत किया जा रहा है। यह स्टेशन वर्ष 1932 में बनकर तैयार हुआ था। इसके बाद अब 92 वर्षों के बाद स्टेशन का जीर्णोद्धार हो रहा है।
ग्राउंड फ्लोर पर हो चुका 50 प्रतिशत से अधिक काम
प्राजेक्ट की बात करें तो ग्राउंड फ्लोर का कार्य 50 प्रतिशत से अधिक तैयार हो चुका है। अब प्रथम तल पर कार्य जारी है। दावा है कि नवनिर्माण होने के बाद बहादुरगढ़ उद्योग नगरी में रेलवे की पर्याप्त जमीन होने के चलते इस स्टेशन को शानदार लुक मिलेगा। जल्द ही स्टेशन पर विद्युत, पार्किंग, वेटिंग एरिया, लैंड स्केपिंग जैसे क्षेत्रों में विस्तार होगा। स्टेशन की दूसरी एंट्री के लिए सिटी प्लानर के अनुसार दूसरी एंट्री और सर्कुलेटिंग एरिया का विकास होगा। साथ ही पार्सल, वेटिंग हॉल, प्लेटफार्म, रिटायरिंग रूम, कार्यालयों में फर्नीचर होगा। बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार दिव्यांगजन सुविधाएं, एलईडी आधारित स्टेशन नाम बोर्ड व लाइटिंग, महिलाओं, दिव्यांगजनों के लिए पर्याप्त शौचालय, नई सुविधाओं के निर्माण के लिए भविष्य में नए भवन की आवश्यकता, भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर रूफ प्लाजा, दूरसंचार विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार वाई-फाई का प्रावधान भी किया जाएगा।
वर्ष 1932 में बना था रेलवे स्टेशन
बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन 1932 में बना था। इसके बाद अब स्टेशन को अत्याधुनिक बनाने की परियोजना के तहत बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बड़ा पार्किंग एरिया, 24 घंटे बिजली, पीने का पानी, वातानुकूलित लॉबी, हाई स्पीड एस्केलेटर, एयर कॉनकोर्स और होटल जैसी सुविधाएं जोड़ने की प्लानिंग है। रेल अधिकारियों ने बताया कि योजना के मुताबिक सभी चयनित स्टेशन का सुधार होगा। इसी तरह स्टेशन पर प्रवेश द्वार का चौड़ीकरण, उच्चस्तरीय प्रकाश व्यवस्था, स्टेशन वेटिंग हॉल का विस्तार, स्टेशन पर उपलब्ध अनुपयोगी स्थान को जोड़ते हुए एग्जीक्यूटिव लाउंज का विस्तार, अप्रोच सड़क का चौड़ीकरण, पैदल चलने वालों के लिए रास्ता, वाहन का प्रवेश-अस्तित्व, भूनिर्माण, दूसरा प्रवेश द्वार हरे पैच और स्थानीय कला को बढ़ावा देने के लिए कार्य किए जाने हैं। प्लेटफार्मों व शैडों की लंबाई भी बढ़ाई जाएगी।