बादली। अहोई पर्व पर बच्चों की लंबी उम्र के लिए सुमन को व्रत रखना था। शनिवार को वह इसे लेकर वह बहुत उत्साहित थी, लेकिन ईश्वर को शायद कुछ ही मंजूर था। त्योहार की खुशी गम में बदल गई। ऐसी अनहोनी हुई तो व्रत रखने से पहले से दोनों बच्चे दुनिया से विदा हो गए। घर पर पति और दोनों बच्चों को फंदे पर लटका देख हर किसी का कलेजा कांप गया। एक साथ तीनों की अर्थियां उठीं और शमशान में एक ही चिता पर तीनों का अंतिम संस्कार हुआ तो हर किसी की आंखे भर आई।
गंगड़वा में पिता के साथ दो बच्चों की मौत के बाद पूरे गांव में मातम पसरा था। त्योहार की खुशियां गम में बदली थी। की महिलाओं ने व्रत रखना तो दूर दिनभर घरों में चूल्हा तक नहीं जलाया। गांव में सन्नाटा पसर गया और पीडि़त परिवार को सांत्वना देने के लिए पूरा गांव उमड़ा। हादसे को देखकर हर एक के मुंह से बस एक ही शब्द निकल रहा था कि मासूम बच्चों का आखिर क्या दोष था।
गांव के श्मशान घाट में तीनों का अंतिम संस्कार किया गया जिसमें ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास के गांवों के लोगों ने भी परिजनों को संभालने का प्रयास किया। शाम को एक ही चिता पर तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। गांव से तीन अर्थियां एक साथ उठी तो पूरा गांव शोक की लहर में डूब गया।
जिस रस्सी से कराता था अभ्यास, उसी से लगाया बच्चों को फंदा
परिजनों और ग्रामीणों की मानें तो कर्मबीर अपने बच्चों से बेहद प्यार करता था और बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत करने के साथ साथ प्रतिदिन पुत्री मुस्कान और पुत्र तनुज को सुबह दौड़ करवाने के बाद छत पर बने कमरे में अभ्यास करवाता था। परिजनों को क्या पता था कि जिस रस्सी के सहारे कर्मबीर बच्चों को लटकाकर उनकी हाइट बढ़ाने की एक्सरसाईज करवाता था, वही रस्सी एक दिन फांसी का फंदा बन जाएगी।