झज्जर। जिला स्तरीय खेल स्टेडियम के निर्माण में बार-बार बाधाएं आ रही हैं। वर्ष 2012 में कांग्रेस के शासन काल में स्टेडियम की घोषणा हुई, लेकिन करीब आठ साल तक जमीन नहीं मिली। 2019 में भाजपा सरकार के दौरान सिलाना गांव में जमीन को मंजूरी मिली इसके बाद अगस्त 2019 में मुख्यमंत्री ने स्टेडियम का भूमि पूजन किया। उस समय इसका बजट 19.77 करोड़ रुपये था, लेकिन केवल 9 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ। बजट की कमी के साथ अब एक और समस्या खड़ी हो गई है, स्टेडियम के साथ लगती जमीन में करीब तीस फुट गहराई तक अवैध खनन हो चुका है इस कारण चाहर दीवारी और खेल के लिए कोर्ट बनाने में समस्या आ रही है।इस समस्या का समाधान करने के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये का बजट और बढ़ रहा है। चाहर दीवारी का काम भी इसके बाद पूरा हो पाएगा और उसके बाद ही खेल मैदान तैयार हो पाएंगे।
जिला स्तरीय खेल स्टेडियम के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत सिलाना की तरफ से करीब 20 एकड़ जमीन भी फ्री में दी जा चुकी है। जिला स्तरीय खेल स्टेडियम तैयार होने के बाद खिलाड़ियों को अनेक प्रकार की सुविधाएं मुहैया हो पाएगी। इस स्टेडियम में बहुउद्देशीय हॉल, कबड्डी, बास्केटबाल, वालीबाल, हैंडबाल, फुटबाल, हॉकी मैदान, स्वीमिंग पुल, स्टेज, रनिंग ट्रैक, फर्स्ट एड रूम, चेंजिंग रूम आदि सुविधाएं इस स्टेडियम में मुहैया कराई जाएंगी। जबकि झज्जर जिला मुख्यालय पर मात्र महर्षि दयानंद सरस्वती खेल स्टेडियम ही है, जहां केवल बॉक्सिंग हाल की सुविधा है। वहीं क्रिकेट के लिए नेहरू कॉलेज का खेल स्टेडियम है। इसके अलावा कोई भी खेल स्टेडियम जिला मुख्यालय पर नहीं है।
- वर्जन
सरकार की तरफ से स्टेडियम के निर्माण के लिए करीब 20 करोड़ रुपये का बजट जारी करना था, लेकिन अब तक करीब 9 करोड़ रुपये ही जारी हो पाए हैं। अब अवैध खनन के कारण चाहर दीवारी आदि के लिए करीब डेढ़ करोड़ का खर्च और बढ़ेगा।
- राजेश कुमार, ठेकेदार।
स्टेडियम की जमीन के साथ लगते खेतों में करीब तीन फुट तक अवैध खनन हुआ है। इसकी वजह से खेल मैदान व चाहर दीवारी के निमार्ण में बाधा आ रही है।
- सुमित कुमार, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, झज्जर।