झज्जर। लड़ाई न झगड़ा। न लूट-चोरी का भय। समाज की जड़ों को खोखला बना रहे नशे से कोसों दूर। आज के दौर में ऐसे स्थान की कल्पना भी बेमानी सी लगती है। पर अपराध और नशे से दूर झज्जर जिले के छह गांव सच में रामराज का एहसास कराते हैं। सौहार्द और बदलाव की बानगी बने यह छह गांव कन्हवा, नवादा, बाजितपुर, खेड़ा थारू, कोंदरावली तथा बाबेपुर हैं। अपराध मुक्त घोषित इन गांवों से वर्ष 2023 में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
यहां के चुने हुए नुमाइंदे और ग्रामीण छोटे-मोटे विवाद और मन-मुटाव को आपस में बैठकर सुलझा लेते हैं। युवा वर्ग को नशा रूपी बुराई से दूर रखने के लिए जागरूकता का बीड़ा बड़े-बुजर्गाें ने उठाया हुआ है। नतीजन, इन गांवों की चर्चा जब चलती है तो दूसरे गांवों के लोग यहां तक कहते हैं कि यहां रामराज है। सब मिल-जुलकर रहते हैं। एक-दूसरे की फिक्र करते हैं। युवा पीढ़ी भटके नहीं इसके लिए मार्गदर्शन करते हैं।
मेरा गांव, मेरा गौरव सम्मान से नवाजा :
दूसरों गांवों के लिए अनुकरणीय बनने पर इन गांवों को पुलिस अधीक्षक डॉ. अर्पित जैन ने मेरा गांव, मेरा गौरव सम्मान से नवाजा। गांव कन्हवा से सरपंच राजेश कुमार, नवादा से सरपंच सतबीर, बाजीतपुर से सरपंच अशोक, खेड़ा थरू से सरपंच आशीष, कोंधरावली से सरपंच प्रतिनिधि और बाबेपुर से सरपंच राजेश को सम्मानित किया गया।
गांव में एक साल में कोई अपराध नहीं हुआ है और न ही कोई नशा करता है। युवाओं को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाता है।
सतबीर, सरपंच, नवादा
हमारा गांव जिले के अंतिम छोर पर है। तीन साल से कोई आपराधिक वारदात और नशे का केस गांव में नहीं है। यह हर ग्रामीण के लिए सम्मान की बात है।
आशीष, सरपंच, खेड़ी थरू
वर्जन
जिले में 6 गांव ऐसे हैं, जहां पिछले एक साल में कोई आपराधिक घटना या नशे का कोई मामला सामने नहीं आया है। इनसे दूसरों को भी सीख लेनी चाहिए। 15 गांव ऐसे हैं जहां एक साल में नशे का कोई केस नहीं आया। वहीं 20 गांवों में आपराधिक वारदात नहीं हुई। अपराध और नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए यह पहल वाकई प्रशंसनीय है।
- डॉ. अर्पित जैन, पुलिस अधीक्षक, झज्जर