झज्जर। जिले में 44 हजार संपत्तियों के मालिकों की तलाश नगर निकायों को है। इन संपत्तियों पर न तो किसी ने मालिकाना हक जताया है और न ही इनकी एंट्री प्रॉपर्टी आईडी में दर्ज है। इनमें न तो मालिकों के नाम दर्ज हुए और न ही किसी का मोबाइल नंबर दर्ज है। यह सभी प्रॉपर्टी नगर निकायों के लिए परेशानी बन चुकी हैं। इनमें से अधिकतर खाली प्लाॅट है। इन खाली प्लाटों पर न तो कोई निर्माण कर रहा है, जिससे नगर निकायों को न तो टैक्स मिल रहा है और न ही विकास शुल्क मिल पा रहा है। ऐसी प्रॉपर्टी सबसे ज्यादा झज्जर और बहादुरगढ़ नगर परिषद में है।
प्रदेश भर में निजी कंपनी ने प्रॉपर्टियों का सर्वे किया था। सर्वे करने के बाद ऐसी प्रॉपर्टी जिनमें कोई नहीं मिला था, उनमें एनए लिख दिया गया यानी न मालिक और न ही मोबाइल नंबर दर्ज किया गया। निजी कंपनी का सर्वे सरकार ने रद्द कर दिया। उसके बाद से ही यह सभी प्रॉपर्टी नगर नगर परिषद के सिरदर्द बन गई हैं।
नई कंपनी ने भी खाली प्लाटों में डाले बिल
बेशक पुरानी कंपनी ने लापरवाही कर खाली प्लाटों की जानकारी अपडेट नहीं की, लेकिन नई कंपनी भी पीछे नहीं रही। झज्जर नगर परिषद में 38 हजार बिल बनाने का ठेका दिया गया। नई कंपनी ने खाली पडे़ प्लाटों के भी बिल तैयार कराए और उसके बाद वितरण के दौरान बिलों को खाली प्लाटों पर चस्पा कर दिया गया या फिर वहीं डाल दिया गया। क्योंकि न ताे उनके मालिक मिले और न ही मोबाइल नंबर दर्ज थे।
बकायादारों की सूची तैयार करा रहे
नगर परिषद द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स के बकायादारों की सूची तैयार करवाई जा रही हैं। ऐसी सभी की लिस्ट तैयार हा रही है। इसमें सबसे ज्यादा राशि के बकायादारों के अलावा सरकारी संस्थाओं की सूची अलग-अलग तैयार करवाई जा रही है ताकि उनको नोटिस जारी किए जा सकें। यहां बता दे कि शहर के लोगों पर करोड़ों रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स व उसका एरियर बकाया है। लोग अपना प्रॉपर्टी टैक्स और एरियर भरने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाते। सरकार ने 29 फरवरी तक टैक्स में फिर से छूट भी प्रदान की है।
किस नगर परिषद व पालिका में कितनी बेमानी प्रॉपर्टी
झज्जर नगर परिषद
निवासीय-2200
कमर्शियल-522
खाली प्लाट- 14551
अन्य-12
बहादुरगढ़ नगर परिषद
निवासीय-9698
कमर्शियल-1570
खाली प्लाट-15701
अन्य-640
बेरी नगर पालिका
निवासीय-656
कमर्शियल-46
खाली प्लाट-440
अन्य-6
वर्जन
खाली प्लाट के मालिक खुद अपना नाम व मोबाइल नंबर दर्ज करवा सकते हैं। नगर परिषद को इसकी जानकारी नहीं होती कि यह प्रॉपर्टी आखिर किसकी है। ऐसी प्रॉपर्टी के मालिक खुद आकर अपना नाम व मोबाइल नंबर दर्ज करवाए।
विवेक जैन, बिल्डिंग इंस्पेक्टर, नगर परिषद, झज्जर