झज्जर में सैटेलाइट ने जिले में 20 अलग-अलग स्थानों पर आग लगने की लोकेशन दिखाई तो अधिकारियों के पसीने छूट गए। जब लोकेशन पर जाकर जांच की तो सामने आया कि यहां पराली नहीं बल्कि कारणों से आग लगी थी। अधिकारियों ने यह रिपोर्ट आगे भेज दी है।
हर साल पराली जलाने के मामले सामने आते हैं, लेकिन झज्जर जिला ग्रीन जोन में है। यहां पिछले कुछ सालों से बहुत कम पराली जलाने के मामले सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद कृषि विभाग अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रहा है ताकि किसान पराली नहीं जलाई जाए। इसमें काफी हद तक कामयाबी भी मिली है।
यही वजह है कि पिछले तीन साल में 10 से भी कम मामले पराली जलाने के सामने आए। आंकड़ों पर गौर करे तो 2021 में 7 मामले पराली जलाने के सामने आए थे। इसी प्रकार से 2022 में पराली जलाने के 8 मामले सामने आए हैं। इस साल की बात करें तो सैटेलाइट के जरिये कुल 20 लोकेशन पकड़ी गई, इसमें से केवल दो लोकेशन ही सही मिली, जहां पराली जलाई गई थी। इन दोनों किसानों को 2500-2500 रुपये का जुर्माना किया गया था। बाकी 18 लोकेशन पर आग तो लगी थी, लेकिन पराली में आग लगी नहीं मिली।
केस-एक
दादरी तोय में बाजरा की पुली में लगी मिली आग
सबसे पहली पराली जलाने की लोकेशन सैटेलाइट द्वारा दादरी तोए गांव में भेजी गई थी। सूचना पाकर अधिकारी गांव में मौके पर पहुंचे। जब अधिकारी मौके पर गए तो वहां पर पराली की बजाय बाजरा की पुली में आग लगी मिली। वह भी किसी अज्ञात ने जान-बुझकर लगाई थी।
केस-दो
खैरपुर में औद्योगिक कचरा जलता मिला
सैटेलाइट द्वारा एक लोकेशन खेरपुर गांव की भेजी गई, जहां पराली जलती की लोकेशन भेजी गई थी। जब अधिकारी मौके पर पहुंचे तो वहां पर औद्योगिक इकाईयों द्वारा कचरा जलाता हुआ मिला। कृषि विभाग के अधिकारियों ने इसकी जानकारी प्रदूषण विभाग को दी ताकि वह आगे की कार्रवाई कर सके।
जिले में सैटेलाइट से अब तक पराली जलाने की 20 लोकेशन भेजी गई थी, इसमें मौके पर दो लोकेशन सही मिली। बाकी जगह किसी अन्य वजह से आग लगी हुई थी। जहां पराली जलती मिली थी, उन किसानों पर जुर्माना किया गया है।
- डॉ. ईश्वर जाखड़, तकनीकी अधिकारी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, झज्जर