झज्जर। धांधलान गांव में पट्टे की जमीन पर खेती करने वाले एक साधारण किसान का बेटा सागर बर्मिंघम में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में अपने मुक्के का दम दिखाएगा। चार साल की मेहनत के दम पर सफलता की सीढ़ियां चढ़ता हुआ वह इस मुकाम पर पहुंचा है। प्रतियोगिता 28 जुलाई से शुरू होगी। फिलहाल सागर आयलैंड में प्रशिक्षण ले रहा है।
सागर के कोच हितेश देशवाल ने बताया कि सागर की फिटनेस और लंबाई काफी अच्छी है। इसे देखते हुए उन्होंने 4 साल पहले मुक्केबाज सीखने के लिए कहा था। सागर ने उनकी बात मानीं और मुक्केबाजी सीखनी शुरू कर दी। उस वक्त उसकी उम्र 18 साल थी। सागर के पंच काफी मजबूत थे। लंबाई का वह खूब फायदा उठाता था। उन्हें लगने लगा था कि मुक्केबाजी में सागर एक दिन बुलंदियों तक पहुंचेगा। उसने पूरी मेहनत की। कम समय में सागर ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और चंडीगढ़ चैंपियन बना। उसके बाद लगातार 2 बार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन बना और 2 बार खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन बना। इसके साथ ही राष्ट्रीय मुक्केबाजी में पदक जीता। इसके बाद उसका भारत की टीम के लिए चले कैंप में चयन हो गया।
कोरोना काल में भी नहीं छोड़ी प्रेक्टिस
कोरोना काल के दौरान जब कैंप बंद हुए तो कोच हितेश देशवाल ने सागर को अकेले भी प्रेक्टिस कराई। कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रायल में सागर ने शानदार प्रदर्शन किया और उसने पहले ट्रायल में ओलंपिक 2020 प्रतिभागी सतीश कुमार को हराया, फिर फाइनल में नरेंद्र को मात दी। सागर के प्रदर्शन की बदौलत उसका चयन 28 जुलाई से 8 अगस्त तक इंग्लैंड के बर्मिंघम आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में हो गया।
परिजनों को भरोसा देश का मान बढ़ाएगा उनका बेटा
सागर के पिता राजेश अहलावत एक साधारण किसान हैं और गांव में पट्टे पर जमीन लेकर खेती करते हैं। उन्होंने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए काफी संघर्ष किया है। उसकी माता मुकेश गृहिणी है और उसकी एक बहन है। पिता राजेश व माता मुकेश का कहना है कि उन्हें विश्वास है कि उनका बेटा राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत कर देश का मान बढ़ाएगा।